
छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में धर्मांतरण और अंतिम संस्कार को लेकर सामाजिक तनाव का एक और मामला सामने आया है। उलनार गांव में एक मतांतरित महिला के अंतिम संस्कार को लेकर आदिवासी समाज और मृतका के परिजनों के बीच दो दिनों तक विवाद की स्थिति बनी रही। ग्रामीण पारंपरिक मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार किए जाने का विरोध कर रहे थे, जिसके बाद मामला प्रशासन तक पहुंचा।
अंतिम संस्कार को लेकर चल रहा विवाद
विवाद बढ़ने की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन ने हस्तक्षेप किया और दोनों पक्षों के बीच बातचीत के जरिए मामले को शांत कराने का प्रयास किया। प्रशासन की पहल के बाद दो दिनों से जारी तनाव समाप्त हुआ और अंतिम संस्कार को लेकर चल रहा विवाद शांत हो सका।
पारंपरिक सामुदायिक व्यवस्था
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बस्तर के कई आदिवासी इलाकों में धर्मांतरण के बाद अंतिम संस्कार और कब्रिस्तान के इस्तेमाल को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। इन मामलों में एक ओर परिवार अपने धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार की मांग करते हैं, वहीं कुछ ग्रामीण पारंपरिक सामुदायिक व्यवस्था और स्थानीय रीति रिवाजों का हवाला देते हुए इसका विरोध करते हैं।
पक्षों के अधिकारों और संवेदनशीलता का भी ध्यान
उलनार की घटना ने एक बार फिर बस्तर के आदिवासी गांवों में बढ़ते सामाजिक तनाव और धर्मांतरण से जुड़े विवादों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन के सामने अब चुनौती यह है कि ऐसे मामलों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ साथ सभी पक्षों के अधिकारों और संवेदनशीलता का भी ध्यान रखा जाए।
संवाद की जरूरत महसूस
फिलहाल प्रशासन की दखल के बाद उलनार गांव में स्थिति शांत बताई जा रही है। हालांकि, क्षेत्र में ऐसे विवाद दोबारा न बढ़ें, इसके लिए प्रशासन और स्थानीय स्तर पर संवाद की जरूरत महसूस की जा रही है।
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