
सागर मनीष कुमार चौबे की रिपोर्ट: न्यायालयों में लंबे समय से लंबित चेक बाउंस (धारा 138 एन.आई. एक्ट) के मामलों के शीघ्र और आपसी सहमति से समाधान के लिए शनिवार, 18 जुलाई 2026 को सागर जिला न्यायालय सहित जिले के सभी तहसील न्यायालयों में विशेष लोक अदालत का आयोजन किया गया। मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के दिशा-निर्देशों के तहत आयोजित इस विशेष लोक अदालत में कुल 44 प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया। इन मामलों में कुल 1 करोड़ 25 लाख 93 हजार 786 रुपये की समझौता राशि तय की गई।
जिला न्यायालय परिसर में हुआ शुभारंभ
विशेष लोक अदालत का विधिवत शुभारंभ सुबह 10:30 बजे जिला न्यायालय परिसर स्थित ए.डी.आर. सेंटर भवन के सभागार में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रधान जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सागर के अध्यक्ष महेश कुमार शर्मा द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर की गई। इस अवसर पर न्यायिक क्षेत्र से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी एवं अधिवक्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार साहू, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश सुधांशु सक्सेना, द्वितीय व्यवहार न्यायाधीश प्रीतम बंसल, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अंकित श्रीवास्तव, जिला विधिक सहायता अधिकारी श्रीमती दिव्या भलावी, अधिवक्ता संघ अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह राजपूत, अधिवक्ता संघ सचिव वीरेन्द्र राजपूत सहित बड़ी संख्या में अधिवक्तागण एवं न्यायालयीन कर्मचारी मौजूद रहे।
17 खंडपीठों ने किया मामलों का निराकरण
विशेष लोक अदालत में लंबित मामलों के त्वरित निराकरण के लिए जिला एवं तहसील न्यायालयों में कुल 17 खंडपीठों का गठन किया गया था। इन खंडपीठों के माध्यम से दोनों पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया गया और आपसी सहमति एवं मध्यस्थता के आधार पर वर्षों से लंबित विवादों का समाधान कराया गया।
लोक अदालत के प्रमुख आंकड़े
गठित खंडपीठों की संख्या: 17
निराकृत कुल प्रकरण: 44
समझौता राशि: ₹1,25,93,786/-
पक्षकारों को मिली राहत
लोक अदालत में हुए समझौतों से जहां न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ कम हुआ, वहीं पक्षकारों को भी लंबे समय तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया, समय की बर्बादी और मानसिक तनाव से राहत मिली। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, चेक बाउंस जैसे आर्थिक मामलों में लोक अदालत विवादों को आपसी सहमति से समाप्त करने का प्रभावी माध्यम है। इससे दोनों पक्षों को त्वरित न्याय मिलता है और संबंधों में भी सौहार्द बना रहता है।
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