
ग्लासगो: टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता और दिग्गज भारतीय भारोत्तोलक (वेटलिफ्टर) मीराबाई चानू ने ग्लासगो 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्णिम इतिहास रच दिया है। रविवार को महिलाओं की 48 किलोग्राम भारवर्ग स्पर्धा में मीराबाई ने न केवल शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार तीसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स का गोल्ड मेडल अपने नाम किया, बल्कि वे इस बार के राष्ट्रमंडल खेलों में भारत को पहला स्वर्ण दिलाने वाली खिलाड़ी भी बन गईं।
अपनी इस ऐतिहासिक जीत, रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन और भावुक पलों की पूरी रिपोर्ट नीचे दी गई है:
‘परिवार और कोच का संबल ही मेरी ताकत’
ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए 31 वर्षीय मीराबाई चानू अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार और गुरु को देते हुए काफी भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा, “चोटों और संघर्षों से भरे मेरे पूरे सफर में परिवार ने हर कदम पर मेरा अटूट समर्थन किया है। कई बार गंभीर चोटें आईं, लेकिन परिवार की ताकत ने मुझे कभी टूटने नहीं दिया।”
इसके साथ ही मीराबाई ने अपने लंबे समय के कोच विजय शर्मा की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि शीर्ष स्तर पर लगातार बेहतरीन प्रदर्शन बनाए रखना आसान नहीं होता। कोच विजय सर ने ट्रेनिंग, फोकस और परफॉर्मेंस को बनाए रखने में हमेशा उनका मार्गदर्शन किया। चानू ने बताया कि लंबे समय तक अपने शरीर के वजन को 48 किग्रा वर्ग में बनाए रखना और नियंत्रित करना उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है।
गलतियों से उबरकर बनाए रिकॉर्ड, ऐसे जीता ‘गोल्ड’
मुकाबले की शुरुआत में मीराबाई को थोड़े झटके का सामना करना पड़ा जब स्नैच श्रेणी के पहले प्रयास में वे 82 किलोग्राम वजन उठाने में चूक गईं। हालांकि, उन्होंने तुरंत वापसी करते हुए दूसरे प्रयास में 82 किग्रा भार सफलतापूर्वक उठाया। इसके बाद अपने अंतिम प्रयास में मीराबाई ने 85 किलोग्राम का वजन उठाकर कॉमनवेल्थ गेम्स में स्नैच का नया रिकॉर्ड कायम कर दिया।
इसके बाद ‘क्लीन एंड जर्क’ राउंड में भी पहली कोशिश में असफल होने के बाद भारतीय स्टार ने दूसरे प्रयास में 105 किलोग्राम भार उठाकर बाकी प्रतिद्वंद्वियों को बहुत पीछे छोड़ दिया। क्लीन एंड जर्क में उन्होंने निकटतम प्रतिद्वंद्वी से 8 किग्रा अधिक वजन उठाया और आसानी से स्वर्ण पदक पर कब्जा कर लिया। इससे पहले मीराबाई ने 2018 (गोल्ड कोस्ट) और 2022 (बर्मिंघम) में भी स्वर्ण पदक जीता था।
पोडियम पर छलके खुशी के आंसू
जब मेडल सेरेमनी के दौरान पोडियम पर भारत का राष्ट्रध्वज तिरंगा फहराया गया और राष्ट्रगान गूंजा, तो मीराबाई अपने आंसुओं को रोक नहीं पाईं। उन्होंने कहा, “जब राष्ट्रगान बजता है, तो आंखों से आंसू अपने आप निकल आते हैं। वे देश के लिए पहला स्वर्ण पदक जीतने की असीम खुशी के आंसू थे।”
प्रतिद्वंद्वियों और प्रशंसकों ने बांधे तारीफों के पुल
रजत पदक विजेता (नाइजीरिया): नाइजीरिया की रूथ असुकुओ न्योंग ने कुल 168 किग्रा (75 स्नैच + 93 क्लीन एंड जर्क) उठाकर सिल्वर मेडल जीता। उन्होंने मीराबाई को बधाई देते हुए कहा कि मीराबाई का प्रदर्शन प्रेरणादायक है।
कांस्य पदक विजेता (मलेशिया): मलेशिया की आइरीन हेनरी ने कुल 167 किग्रा (77 स्नैच + 90 क्लीन एंड जर्क) के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। आइरीन ने कहा, “मीराबाई और मैं बहुत अच्छी दोस्त हैं, हम सोशल मीडिया पर भी जुड़े हैं। उनके खिलाफ खेलना हमेशा सम्मान की बात होती है।”
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