कमिश्नर कार्यालय में लंबित फाइलों का अंबार, डेढ़ हजार से अधिक मामलों के अटके होने की चर्चा

एक बड़े विभाग के कमिश्नर इन दिनों अपने कार्यालय में लंबित फाइलों की बढ़ती संख्या को लेकर विभागीय गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं। बताया जा रहा है कि उनके कार्यालय में ई-फाइलों और मैन्युअल फाइलों को मिलाकर करीब डेढ़ हजार फाइलें लंबित हैं, जिनका निपटारा अभी तक नहीं हो सका है। विभाग के भीतर यह स्थिति चिंता का कारण मानी जा रही है, क्योंकि हर दिन नई फाइलें कार्यालय में पहुंच रही हैं, जबकि पहले से लंबित मामलों का निराकरण अपेक्षित गति से नहीं हो पा रहा है। इससे प्रशासनिक कार्यों की रफ्तार पर असर पड़ने की बातें भी सामने आ रही हैं। कई अधिकारी मानते हैं कि यदि यही स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो विभिन्न योजनाओं, प्रस्तावों और प्रशासनिक निर्णयों के क्रियान्वयन में और अधिक देरी हो सकती है। विभागीय कर्मचारियों के बीच भी यह चर्चा है कि फाइलों का बढ़ता दबाव अब सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया को प्रभावित करने लगा है।

सूत्रों के मुताबिक, जब भी कोई अधिकारी किसी महत्वपूर्ण प्रस्ताव या जरूरी फाइल को लेकर कमिश्नर के कक्ष में पहुंचता है तो उसे कई बार लंबे इंतजार का सामना करना पड़ता है। कई मामलों में अधिकारियों को एक ही फाइल के संबंध में बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे न केवल अधिकारियों का समय प्रभावित हो रहा है, बल्कि उन परियोजनाओं और प्रशासनिक मामलों पर भी असर पड़ रहा है, जिनके लिए समय पर स्वीकृति या निर्णय आवश्यक होता है। विभाग के कुछ कर्मचारियों का कहना है कि लंबित फाइलों की संख्या लगातार बढ़ने से काम का दबाव भी बढ़ता जा रहा है और निर्णय प्रक्रिया पहले की तुलना में धीमी दिखाई दे रही है। हालांकि इस पूरे मामले पर विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन अंदरूनी स्तर पर इस विषय पर लगातार चर्चा बनी हुई है।

 

विभागीय हलकों में यह भी कहा जा रहा है कि वर्तमान स्थिति में फाइलों से ज्यादा इंतजार “पर्चियों” का हो रहा है। यानी अधिकारी अपनी बारी आने का इंतजार करते रहते हैं और कई महत्वपूर्ण मामलों में निर्णय अपेक्षा से अधिक समय ले रहे हैं। यदि लंबित फाइलों का समयबद्ध निपटारा नहीं हुआ तो इसका प्रभाव विभागीय कार्यप्रणाली, योजनाओं के क्रियान्वयन और आम जनता से जुड़े प्रशासनिक मामलों पर भी पड़ सकता है। प्रशासनिक व्यवस्था में समय पर निर्णय लेना किसी भी विभाग की कार्यक्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर है कि विभाग लंबित फाइलों की संख्या कम करने और कार्यप्रणाली को गति देने के लिए क्या कदम उठाता है। फिलहाल यह मुद्दा विभाग के भीतर चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।

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