
इंदौर: नगर निगम में घोटालों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है, जहां एक मामले की जांच पूरी भी नहीं हो पाती कि दूसरा नया घोटाला सामने आ जाता है। इंदौर नगर निगम के बहुचर्चित फर्जी बिल घोटाले की जांच अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की जा रही है, जिसके इंदौर सब जोनल कार्यालय ने हाल ही में 3.48 करोड़ रुपये मूल्य की 9 अचल संपत्तियों को कुर्क कर लिया है। मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जारी इस जांच में ईडी अब तक कुल 59.18 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क और जब्त कर चुकी है।
ईडी के अनुसार यह महाघोटाला 103.62 करोड़ रुपये का है, जबकि नगर निगम का दावा है कि वास्तविक घोटाला 92 करोड़ रुपये का है। निगम के मुताबिक घोटाले से जुड़ी कुल 693 फाइलों में से 469 फाइलें पूरी तरह से बोगस यानी फर्जी पाई गई हैं, जिनके जरिए जाली कार्यादेश, फर्जी माप पुस्तिकाओं और कूटरचित रिकॉर्ड के आधार पर सरकारी खजाने से यह अवैध भुगतान हासिल किया गया। थाना एमजी रोड में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई इस जांच में ईडी ने मुख्य आरोपी अभयसिंह राठौर, मोहम्मद जाकिर और राहुल वडेरा को गिरफ्तार किया था, जो फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
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दूसरी ओर महापौर पुष्यमित्र भार्गव के कार्यकाल में भ्रष्टाचार मुक्त शासन के दावों के बीच निगम में लगातार नए मामले उजागर हो रहे हैं। एक तरफ जहां नामांतरण घोटाले की जांच रिपोर्ट निगमायुक्त के समक्ष प्रस्तुत होने की चर्चा है, वहीं दूसरी तरफ मस्टरकर्मियों के वेतन घोटाले का नया मामला भी सामने आया है।
इस वेतन घोटाले में मस्टरकर्मियों के नाम पर लगभग 3 लाख रुपये की राशि निकालकर अन्य बैंक खातों में फर्जी तरीके से जमा करा दी गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने 5 अधिकारियों की एक विशेष जांच कमेटी का गठन कर दिया है। इस कमेटी में अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर, देवधर दरवई, उपायुक्त केएस सगर, लेखापाल आशीष तागड़े और सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर कपिल गेहलोत को शामिल किया गया है, जिन्हें एक सप्ताह के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
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