
मैहर/देवेश शर्मा की रिपोर्ट: जिले के विभिन्न प्रशासनिक एवं राजस्व मामलों को लेकर पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवालों पर कलेक्टर विदिशा मुखर्जी के जवाब चर्चा का विषय बन गए हैं। पत्रकारों का आरोप है कि जिले से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों पर स्पष्ट जवाब देने के बजाय उन्हें संबंधित अधिकारियों के पास भेजा गया, जिससे प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पत्रकारों ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जिला कलेक्टर जिले की सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी होती हैं। ऐसे में यदि जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों पर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाती और हर प्रश्न का उत्तर अधीनस्थ अधिकारियों से पूछने की सलाह दी जाती है, तो इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
पत्रकारों ने सबसे पहले देवीधाम से जुड़े आराजी क्रमांक-76 के मामले पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि इस प्रकरण की सुनवाई लंबे समय पहले पूरी हो चुकी है और विभिन्न स्तरों पर जांच भी हो चुकी है, लेकिन लगभग दो वर्षों से अंतिम प्रशासनिक निर्णय लंबित है। इस पर कलेक्टर ने कहा कि जिस अधिकारी के पास मामला लंबित है, उसी से जानकारी ली जाए।
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इसके बाद अमरपाटन तहसील में पदस्थ कर्मचारी सुरेंद्र प्रसाद विडहा के संबंध में प्रश्न पूछा गया। पत्रकारों ने जानना चाहा कि अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त कर्मचारी बिना सीपीसीटी परीक्षा उत्तीर्ण किए किन नियमों के तहत पदोन्नत होकर कानूनगो बने। इस प्रश्न के उत्तर में कलेक्टर ने संबंधित एसडीएम से जानकारी लेने की बात कही।
पत्रकारों ने मैहर स्थित स्वामी नीलकंठ आश्रम में चल रहे संपत्ति विवाद का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि लंबे समय से विवाद की स्थिति बनी हुई है और प्रशासन की भूमिका को लेकर कई सवाल सामने आ रहे हैं। इस पर कलेक्टर ने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है और संबंधित जानकारी एसडीएम से प्राप्त की जा सकती है।
इन जवाबों के बाद पत्रकारों ने प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि जिले की सर्वोच्च अधिकारी ही महत्वपूर्ण मामलों पर जानकारी देने से बचती हैं, तो आम नागरिक अपनी समस्याओं और शिकायतों के समाधान के लिए किससे जवाब मांगें। उनका कहना है कि प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
पत्रकारों ने यह भी कहा कि वे इन सभी मामलों से जुड़े तथ्यों को सार्वजनिक करते रहेंगे और जनहित से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाते रहेंगे। उनका कहना है कि संबंधित मामलों में यदि किसी स्तर पर अनियमितता या लापरवाही हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।
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