
शिवपुरी/ कुलदीप शर्मा: जिले के करैरा निवासी पुष्पेन्द्र सिंह चौहान ने पुलिस अधीक्षक शिवपुरी को आवेदन देकर परिवार न्यायालय परिसर के बाहर 28 जुलाई को हुई कथित घटना की निष्पक्ष जांच कराने तथा उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर क्रमांक 0575/2026 की विवेचना किसी वरिष्ठ अधिकारी से कराए जाने की मांग की है।
एससी/एसटी एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज
आवेदन में पुष्पेन्द्र सिंह ने कहा है कि उनकी नाबालिग पुत्री आरोही की अभिरक्षा को लेकर परिवार न्यायालय में मामला विचाराधीन है। उनका आरोप है कि 28 जुलाई को सुनवाई के बाद न्यायालय से बाहर निकलते समय उनकी पत्नी महक गुहारिया और उनकी मां ने उनके साथ गाली गलौज की तथा उन पर झूठे आरोप लगाए। शिकायतकर्ता का दावा है कि उन्होंने न तो किसी प्रकार की मारपीट की, न गाली गलौज की और न ही कोई जातिसूचक टिप्पणी की। इसके बावजूद उनके खिलाफ गंभीर धाराओं एवं एससी/एसटी एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया गया।
विवेचना का हिस्सा बनाने की मांग
पुष्पेन्द्र सिंह ने अपने आवेदन में यह भी दावा किया है कि उनके पास वीडियो रिकॉर्डिंग और व्हाट्सएप चैट जैसे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य हैं, जिनसे उनके विरुद्ध कथित रूप से पूर्व नियोजित षड्यंत्र के संकेत मिलते हैं। उन्होंने इन इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच कराने और उन्हें विवेचना का हिस्सा बनाने की मांग की है।
बयान दर्ज करने की भी मांग
उन्होंने पुलिस अधीक्षक से परिवार न्यायालय परिसर एवं उसके बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज तथा डीवीआर/एनवीआर सुरक्षित रखने, घटना के समय मौजूद सुरक्षा गार्ड, न्यायालय कर्मचारियों, अधिवक्ताओं और अन्य स्वतंत्र गवाहों के बयान दर्ज करने की भी मांग की है।
झूठे मामलों में फंसाने की साजिश
आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि पूर्व में पुत्री से मिलने के प्रयास के दौरान उनके विरुद्ध अपहरण का मामला दर्ज हुआ था, जिसमें उन्हें न्यायालय से जमानत मिल चुकी है। उनका आरोप है कि वर्तमान मामला भी पुत्री की अभिरक्षा से जुड़े न्यायालयीन विवाद को प्रभावित करने और उन्हें झूठे मामलों में फंसाने की साजिश का हिस्सा है।
कार्रवाई करने की मांग
उन्होंने पुलिस अधीक्षक से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, वैज्ञानिक एवं साक्ष्य आधारित जांच कराकर सत्य सामने लाने तथा यदि आरोप असत्य पाए जाएं तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।
नोट: यह समाचार शिकायतकर्ता द्वारा पुलिस अधीक्षक को दिए गए आवेदन में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। संबंधित पक्ष का पक्ष तथा पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया फिलहाल सामने नहीं आई है। मामले की जांच के बाद ही तथ्यों की पुष्टि हो सकेगी।
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