
भोपाल/रानू परिहार की रिपोर्ट: मध्य प्रदेश सरकार ने समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। सरकार द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावित मसौदे में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने, लिव-इन रिलेशनशिप और संपत्ति से जुड़े नियमों को सभी नागरिकों के लिए एक समान बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य धर्म के आधार पर अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की जगह सभी नागरिकों को समान अधिकार और समान न्याय उपलब्ध कराना है।
सरकार ने हाल ही में विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड विधेयक-2026 प्रस्तुत किया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे मानसून सत्र में विस्तृत चर्चा के लिए रखा गया है। सरकार का दावा है कि यह कानून सामाजिक समानता, महिलाओं के अधिकारों और पारदर्शी न्याय व्यवस्था की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित होगा।
बेटा और बेटी को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार
प्रस्तावित मसौदे का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान पैतृक संपत्ति से जुड़ा है। ड्राफ्ट के अनुसार अब बेटा और बेटी दोनों को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार मिलेगा। सरकार का मानना है कि इससे महिलाओं को आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बनाया जा सकेगा और उत्तराधिकार से जुड़े विवादों में कमी आएगी। अब तक विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों में उत्तराधिकार के अलग-अलग प्रावधान होने के कारण कई मामलों में विवाद की स्थिति बनती थी। प्रस्तावित कानून इन असमानताओं को समाप्त कर सभी पात्र उत्तराधिकारियों के लिए समान व्यवस्था लागू करने की बात करता है।
माता-पिता की देखभाल नहीं करने पर संपत्ति अधिकारों पर असर
यूसीसी मसौदे में सामाजिक जिम्मेदारी को भी कानूनी आधार देने का प्रयास किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार यदि कोई संतान अपने बुजुर्ग माता-पिता की उपेक्षा करती है या उनके भरण-पोषण की जिम्मेदारी नहीं निभाती, तो निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत उसके संपत्ति संबंधी अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। सरकार का कहना है कि इस प्रावधान का उद्देश्य बुजुर्गों को सम्मानजनक जीवन और कानूनी सुरक्षा प्रदान करना है, ताकि उन्हें अपने ही परिवार में उपेक्षा का सामना न करना पड़े।
विवाह का पंजीकरण होगा अनिवार्य
प्रस्तावित कानून के तहत सभी धर्मों के नागरिकों के लिए विवाह का पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का मानना है कि इससे विवाह संबंधी विवादों, फर्जी विवाह और दस्तावेजी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
लिव-इन रिलेशनशिप भी कानून के दायरे में
मसौदे में लिव-इन रिलेशनशिप को भी कानूनी मान्यता के दायरे में लाने का प्रस्ताव है। इसके तहत लिव-इन संबंधों का पंजीकरण आवश्यक होगा। सरकार का तर्क है कि इससे महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा होगी तथा ऐसे संबंधों के दुरुपयोग पर रोक लगाई जा सकेगी।
तलाक, हलाला, तीन तलाक और गोद लेने के नियम होंगे समान
प्रस्तावित यूसीसी में विवाह विच्छेद (तलाक), गोद लेने की प्रक्रिया और पारिवारिक अधिकारों से जुड़े नियम सभी नागरिकों के लिए समान बनाए जाने का प्रस्ताव है। मसौदे में तीन तलाक और हलाला जैसी प्रथाओं पर रोक संबंधी प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इससे सभी नागरिकों को समान कानूनी संरक्षण मिलेगा।
छह सदस्यीय समिति तैयार कर रही अंतिम मसौदा
राज्य सरकार ने यूसीसी का प्रारूप तैयार करने के लिए सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की अध्यक्षता में छह सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। समिति विभिन्न वर्गों, सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों से सुझाव लेकर अंतिम मसौदा तैयार कर रही है।
सरकार का दावा- 94 प्रतिशत लोगों ने किया समर्थन
सरकार का दावा है कि जनसुझाव प्रक्रिया के दौरान लगभग 94 प्रतिशत लोगों ने यूसीसी के पक्ष में राय दी है। सरकार के अनुसार यह कानून सभी नागरिकों को समान अधिकार देने और न्याय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
विपक्ष और आदिवासी संगठनों ने उठाए सवाल
हालांकि प्रस्तावित यूसीसी को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक संगठनों ने आदिवासी समुदाय की परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक अधिकारों पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि कानून बनाते समय पारंपरिक व्यवस्थाओं और संवैधानिक संरक्षण का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
कानून बनने की प्रक्रिया अभी बाकी
फिलहाल यह केवल प्रस्तावित मसौदा है। इसे प्रभावी कानून बनने के लिए विधानसभा से पारित होना होगा। इसके बाद राज्यपाल की मंजूरी और आवश्यक संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इसे लागू किया जा सकेगा। यदि यह कानून लागू होता है, तो उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद मध्य प्रदेश यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने वाला देश का चौथा राज्य बन जाएगा।
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