
देवास।गौरव व्यास| उज्जैन में प्रस्तावित महाकुंभ की तैयारियों के मद्देनजर मंगलवार को उज्जैन से आए साधु-संतों के प्रतिनिधिमंडल ने देवास जिले में शिप्रा नदी का निरीक्षण किया। प्रतिनिधिमंडल ने सबसे पहले कलेक्टर ऋतुराज सिंह से मुलाकात कर शिप्रा शुद्धिकरण कार्यों की जानकारी ली। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों के साथ गदेसिया, पिपलिया और हवनखेड़ी क्षेत्र में नदी का निरीक्षण किया।
शिप्रा में गंदे पानी पर जताई चिंता
निरीक्षण के दौरान साधु-संतों ने शिप्रा नदी में गंदे पानी के मिलने पर चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि कार्तिक पर्व, अमावस्या और अन्य धार्मिक अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिप्रा में स्नान करने आते हैं। ऐसे में नदी का जल पूरी तरह स्वच्छ होना आवश्यक है।
ईटीपी प्लांट का भी किया निरीक्षण
प्रतिनिधिमंडल ने एक औद्योगिक इकाई के इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) का भी निरीक्षण किया। साधु-संतों ने शुद्धिकरण प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि अपर्याप्त रूप से शुद्ध किया गया पानी उज्जैन की ओर जा रहा है, तो यह गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान सामने आए तथ्यों से मुख्यमंत्री को भी अवगत कराया जाएगा।
प्रशासन ने दी परियोजना की जानकारी
देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने बताया कि शिप्रा शुद्धिकरण के लिए विभिन्न परियोजनाओं पर काम चल रहा है। कुछ कॉलोनियों का गंदा पानी अभी भी नदी में मिल रहा है, जिसे रोकने के लिए कार्य तेजी से जारी है। उन्होंने बताया कि यह परियोजना अगले वर्ष जून तक पूरी होने की संभावना है।
कलेक्टर ने कहा कि औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले रासायनिक युक्त पानी का शुद्धिकरण संबंधित कंपनियों द्वारा किया जा रहा है। प्रशासन का प्रयास है कि महाकुंभ से पहले शिप्रा नदी का जल स्वच्छ और उपयोग योग्य बनाया जाए।
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