
सागर/ मनीष कुमार चौबे: पं. दीनदयाल उपाध्याय शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, सागर में पीएम उषा परियोजना के अंतर्गत “बुंदेलखंड: पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार के अवसर” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में पर्यटन, संस्कृति और स्थानीय धरोहरों के संरक्षण के माध्यम से रोजगार के नए अवसर विकसित करने पर विशेषज्ञों ने व्यापक चर्चा की। समापन अवसर पर मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया तथा काव्य गोष्ठी का आयोजन भी हुआ।
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संगोष्ठी का शुभारंभ डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. यशवंत सिंह ठाकुर, महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता, पीएम उषा परियोजना प्रभारी डॉ. इमराना सिद्दीकी, भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम तिवारी, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अरुण तिवारी, विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी रामकुमार गोस्वामी एवं आरोग्य भारती के जिला संयोजक डॉ. सुखदेव मिश्रा द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।
पर्यटन स्थलों के प्रचार प्रसार से बढ़ेंगे रोजगार: कुलगुरु
मुख्य अतिथि प्रो. यशवंत सिंह ठाकुर ने कहा कि डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय और विश्वविद्यालय परिसर स्थित गौर संग्रहालय बुंदेलखंड की ऐतिहासिक पहचान हैं। उन्होंने युवाओं से पर्यटन स्थलों की स्वच्छता बनाए रखने और उनके व्यापक प्रचार प्रसार का आह्वान करते हुए कहा कि इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे।
बुंदेलखंड की सांस्कृतिक धरोहर रोजगार का मजबूत आधार
प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता ने कहा कि बुंदेलखंड अपनी समृद्ध लोक संस्कृति, लोकगीतों, धार्मिक स्थलों और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध क्षेत्र है। यदि इन संसाधनों का प्रभावी उपयोग किया जाए तो यह युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
पीएम उषा परियोजना प्रभारी डॉ. इमराना सिद्दीकी ने परियोजना की रूपरेखा प्रस्तुत की, जबकि भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम तिवारी, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अरुण तिवारी, रामकुमार गोस्वामी एवं डॉ. सुखदेव मिश्रा ने स्थानीय धरोहरों, मेलों और सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन विकास योजनाओं से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन पर विशेषज्ञों ने रखे विचार
प्रथम वैचारिक सत्र में धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन पर चर्चा हुई। अध्यक्षता करते हुए डॉ. नीलिमा पिंपलापुरे ने बुंदेलखंड को भारत की सांस्कृतिक धड़कन बताते हुए इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की आवश्यकता पर जोर दिया। वरिष्ठ साहित्यकार टीकाराम त्रिपाठी ने ऐतिहासिक संदर्भ साझा किए, जबकि लेखिका डॉ. शरद सिंह ने धार्मिक पर्यटन से रोजगार की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। इंक मीडिया के निदेशक डॉ. आशीष द्विवेदी ने युवाओं से स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
ऐतिहासिक धरोहरों और ग्रामीण पर्यटन पर हुआ विमर्श
द्वितीय वैचारिक सत्र में इतिहास, संस्कृति और पर्यटन को रोजगार से जोड़ने पर विस्तृत चर्चा हुई। प्रो. बी.के. श्रीवास्तव, डॉ. महेश शुक्ला, डॉ. नागेश दुबे, डॉ. ललित मोहन तथा डॉ. अरुण कुमार शुक्ला ने कहा कि ऐरण जैसे पुरातात्विक स्थलों, लोककलाओं, मेलों, वनोपज और खनिज संसाधनों को योजनाबद्ध तरीके से पर्यटन से जोड़कर बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित किया जा सकता है। इस दौरान शोधार्थियों ने ग्रामीण पर्यटन, भू पर्यटन एवं पारिस्थितिकी पर्यटन पर अपने शोध पत्र भी प्रस्तुत किए।
मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से किया सम्मानित
संगोष्ठी के दौरान स्व. डॉ. दिलीप सिंह राजपूत एवं स्व. डॉ. विजय त्रिपाठी की स्मृति में मेधावी छात्र छात्राओं को स्वर्ण पदक, 5 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। अर्थशास्त्र विषय में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए कंचन मिश्रा और मुस्कान साहू, जबकि इतिहास विषय में ऋतिक तिवारी और भूमिका कटारिया को सम्मानित किया गया।
काव्य गोष्ठी के साथ हुआ समापन
राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन भव्य काव्य गोष्ठी के साथ हुआ। वरिष्ठ कवि प्रदीप पांडेय के संचालन में डॉ. अरुण तिवारी, डॉ. नलिन जैन, लोक गायिका प्रमिला सागर एवं अमित आठ्या ने काव्य पाठ प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में नगर के साहित्यकार, शिक्षाविद, शोधार्थी, छात्र छात्राएं तथा महाविद्यालय परिवार के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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