
छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को वापस लेने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता ने इसका विरोध किया। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि यदि राजनीतिक समझौते के आधार पर ऐसे मामलों को वापस लेने की अनुमति दी गई तो इससे भविष्य में होने वाले आंदोलनों के लिए गलत संदेश जाएगा।
आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा असर
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अदालत से कहा कि यदि इस तरह मामलों की वापसी की अनुमति दी जाती है तो “कल जेनरेशन अल्फा, बीटा और आगे की पीढ़ियां भी यही रास्ता अपनाएंगी।” उनका कहना था कि कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों में केवल राजनीतिक सहमति के आधार पर कार्रवाई समाप्त नहीं की जानी चाहिए।
याचिका में क्या मांग की गई
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि केंद्र और राज्य सरकारों को छात्र आंदोलनों के दौरान दर्ज दंगा एवं अन्य आपराधिक मामलों को केवल राजनीतिक समझौते के आधार पर वापस लेने से रोका जाए। याचिकाकर्ता का तर्क है कि ऐसी कार्रवाई कानून के शासन और न्यायिक प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।
मामले की सुनवाई जारी
यह मामला छात्र आंदोलनों से जुड़े मुकदमों और उनकी वापसी को लेकर चल रही न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है। सुप्रीम कोर्ट में इस विषय पर विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई जारी है और अदालत ने मामले में संबंधित पक्षों की दलीलें सुनी हैं। अंतिम निर्णय अभी आना बाकी है।
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