
भोपाल। मंत्रालय में एक अधिकारी के फैसले को लेकर प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज है। मामला उत्तर प्रदेश से करीब दो साल पहले डेप्युटेशन पर मध्य प्रदेश आए एक अधिकारी के प्रदेश कैडर में संविलियन से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि संविलियन की प्रक्रिया के दौरान उनकी मूल नियुक्ति वर्ष 2009 के बजाय 2026 दर्ज कर दिया गया।
संविलियन की फाइल में नियुक्ति वर्ष बदलने का दावा
बताया जा रहा है कि संबंधित अधिकारी को उत्तर प्रदेश से डेप्युटेशन पर मध्य प्रदेश लाया गया था। इसके बाद उन्हें प्रदेश कैडर में संविलियन देने की प्रक्रिया शुरू हुई। फाइल विभिन्न स्तरों से आगे बढ़ते हुए विभाग के प्रमुख सचिव तक पहुंची। इसी दौरान नियुक्ति वर्ष को लेकर कथित तौर पर बदलाव किया गया।
यदि रिकॉर्ड में नियुक्ति वर्ष 2026 दर्ज होता है, तो 2009 से चली आ रही करीब 16 साल की सेवा की वरिष्ठता प्रभावित हो सकती है। इसका असर वेतन निर्धारण और अन्य सेवा लाभों पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
मामले में आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि नियुक्ति वर्ष 2026 दर्ज किया जाना वास्तविक प्रशासनिक निर्णय है, रिकॉर्ड संबंधी त्रुटि है या प्रक्रिया का कोई हिस्सा। संबंधित अधिकारी, विभाग के प्रमुख सचिव या शासन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
ऐसे में सेवा रिकॉर्ड, संविलियन आदेश और संबंधित नियमों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
वरिष्ठता और सेवा लाभ पर पड़ सकता है असर
यदि मूल नियुक्ति वर्ष 2009 है और संविलियन रिकॉर्ड में 2026 दर्ज किया गया है, तो वरिष्ठता निर्धारण, वेतन संबंधी लाभ और भविष्य के सेवा लाभों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए मामले में दस्तावेजों और लागू सेवा नियमों की जांच महत्वपूर्ण होगी।
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