
जबलपुर: सरकारी जमीन के नाम पर कथित करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि वर्ष 2009 में जिस व्यक्ति की मृत्यु हो चुकी थी, उसके नाम से जारी पावर ऑफ अटॉर्नी का कथित तौर पर दुरुपयोग कर वर्ष 2019 से लगातार प्लॉट बेचे जाते रहे। मामला सामने आने के बाद पीड़ित परिवारों ने पुलिस में शिकायत की, लेकिन उनका आरोप है कि पुलिस ने मामले में अपेक्षित सख्ती नहीं दिखाई और केवल एक आरोपी के खिलाफ कार्रवाई कर मामले को सीमित कर दिया।
मृतक के नाम का इस्तेमाल कर प्लॉट बेचने का आरोप
पीड़ितों के अनुसार, आरोपियों ने मृत व्यक्ति के नाम से संबंधित दस्तावेजों और पावर ऑफ अटॉर्नी का कथित रूप से इस्तेमाल करते हुए अलग-अलग लोगों को प्लॉट बेचने का सिलसिला शुरू किया। आरोप है कि यह गतिविधि वर्ष 2019 से चल रही थी और कई लोगों को जमीन के नाम पर लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया। इस मामले ने तब गंभीर रूप ले लिया जब पीड़ित परिवारों को कथित फर्जीवाड़े की जानकारी मिली और उन्होंने पुलिस से शिकायत की।
अन्य लोगों के नाम सामने आने के बावजूद कार्रवाई पर सवाल
पीड़ितों का दावा है कि वर्ष 2022 में आरोपियों से पूछताछ के दौरान कई अन्य लोगों के नाम सामने आए थे। उनका आरोप है कि पिछले तीन वर्षों में संदिग्ध खातों में दो-दो करोड़ रुपये तक की रकम पहुंचने की जानकारी भी सामने आई, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने कथित तौर पर इन लोगों की भूमिका की पर्याप्त जांच नहीं की। पीड़ितों का आरोप है कि मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया, लेकिन कथित रूप से इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और असली मास्टरमाइंड तक पुलिस नहीं पहुंच सकी है।
पुलिस की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। पीड़ितों का कहना है कि कई बार उन्हें स्वयं आरोपियों को पकड़कर पुलिस के पास ले जाना पड़ा, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की। हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक शिकायत में एक प्लॉट की कथित फर्जी बिक्री का मामला सामने आया था। इस आधार पर एफआईआर दर्ज कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है।
कई और लोगों के साथ धोखाधड़ी की आशंका
पुलिस अब इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या गिरफ्तार आरोपी या उससे जुड़े लोगों ने पहले भी अन्य लोगों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन या प्लॉट बेचे हैं। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका तय की जाएगी। यदि जांच में बड़े नेटवर्क और करोड़ों रुपये के लेनदेन की पुष्टि होती है, तो यह मामला केवल एक प्लॉट की धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बड़े स्तर पर जमीन संबंधी फर्जीवाड़े का रूप ले सकता है।
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