
झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। सरकार की ओर से छात्रों की करीब 98 प्रतिशत मांगें मान लिए जाने के दावे के बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांगों पर अभी तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। यही वजह है कि बातचीत और आश्वासनों के बावजूद आंदोलन खत्म नहीं हो पा रहा है।
आखिर किन मुद्दों पर अटका है मामला?
JPSC और JSSC समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर अभ्यर्थियों में लंबे समय से नाराजगी है। प्रदर्शनकारी सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि कथित तौर पर प्रभावित परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
छात्रों की प्रमुख मांगों में विवादित परीक्षाओं को रद्द करना और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच शामिल है। कुछ छात्र संगठनों ने झारखंड से बाहर के सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीशों की निगरानी में न्यायिक जांच की मांग भी उठाई है।
बातचीत हुई, लेकिन भरोसा नहीं बना
सरकार और छात्र संगठनों के बीच बातचीत शुरू हुई है। सरकार ने वार्ता को सकारात्मक बताते हुए कई मांगों पर सहमति की बात कही, लेकिन प्रदर्शनकारी अभी भी आंदोलन जारी रखने पर अड़े हुए हैं। छात्रों का तर्क है कि जब तक विवादित परीक्षाओं और कथित गड़बड़ियों पर निर्णायक कार्रवाई नहीं होती, तब तक केवल आश्वासन से आंदोलन समाप्त नहीं किया जा सकता।
भूख हड़ताल से बढ़ा दबाव
आंदोलन के दौरान छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल ने भी मामले को गंभीर बना दिया है। रिपोर्टों के अनुसार वे अस्पताल में भर्ती हैं और आंदोलनकारी उनकी स्थिति को लेकर सरकार से स्पष्ट जानकारी की मांग कर रहे हैं। आंदोलन के लगातार लंबा खिंचने से छात्रों के बीच सरकार के प्रति नाराजगी भी बढ़ रही है।
विधानसभा मार्च के दौरान बिगड़े हालात
10 अगस्त को छात्रों का बड़ा प्रदर्शन विधानसभा की ओर बढ़ा था। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस, पानी की बौछार और बल प्रयोग किया गया। पुलिस ने बाद में करीब 300 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर वीडियो फुटेज के आधार पर पहचान की कार्रवाई शुरू करने की बात कही।
राजनीतिक समर्थन से भी बढ़ा आंदोलन
छात्रों के आंदोलन को अब राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात कर सरकार से कथित परीक्षा गड़बड़ियों की सीबीआई जांच की सिफारिश करने की मांग की है। उन्होंने एक सप्ताह में कार्रवाई नहीं होने पर खुद भूख हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी है।
छात्रों की असली चिंता सिर्फ एक परीक्षा नहीं
इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी वजह युवाओं के भविष्य से जुड़ी चिंता है। सरकारी नौकरी की तैयारी में अभ्यर्थी वर्षों का समय और बड़ी रकम खर्च करते हैं। परीक्षा में देरी, कथित पेपर लीक या अनियमितता और बार बार होने वाली प्रक्रिया की गड़बड़ियों से उनकी उम्र और नौकरी के अवसर दोनों प्रभावित होते हैं। यही कारण है कि छात्र अब सिर्फ आश्वासन के बजाय भर्ती परीक्षाओं की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और भरोसे की गारंटी चाहते हैं।
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