
टीकमगढ़/धर्मेंद्र सिंह लोधी की रिपोर्ट: स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शासकीय विद्यालयों में बच्चों को सांची पेड़े वितरित किए जाने के सागर संभाग आयुक्त के निर्देश के बावजूद टीकमगढ़ जिले में आदेश के पालन को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। जिले के कई शासकीय विद्यालयों में सांची पेड़े की जगह बूंदी वितरित किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामला केवल शासकीय प्राथमिक शाला ढिमरवां तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। जिले के अन्य विद्यालयों में भी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बच्चों को बूंदी बांटे जाने की जानकारी सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
आदेश के बावजूद बूंदी क्यों बांटी गई?
सागर संभाग आयुक्त द्वारा राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर शासकीय विद्यालयों में बच्चों को सांची पेड़ा वितरित करने के निर्देश दिए गए थे। ऐसे में निर्धारित मिठाई की जगह बूंदी बांटे जाने को लेकर अब सवाल उठ रहा है कि आखिर आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ। यह भी जांच का विषय है कि क्या संबंधित विद्यालयों को सांची पेड़े उपलब्ध नहीं कराए गए थे या विद्यालय स्तर पर ही वैकल्पिक मिठाई की व्यवस्था कर दी गई।
जिलेभर से जानकारी जुटाने की मांग
मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग से जिलेभर के विद्यालयों की जानकारी लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठ रही है। यह पता लगाया जाना जरूरी है कि कितने विद्यालयों में सांची पेड़े वितरित किए गए और कितने विद्यालयों में बूंदी या अन्य मिठाई बांटी गई। इसके साथ ही सांची पेड़ों की मांग, आपूर्ति, भुगतान और बूंदी की खरीद से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की आवश्यकता बताई जा रही है।
जांच हुई तो तय हो सकती है जिम्मेदारी
यदि विभागीय जांच में यह प्रमाणित होता है कि संभाग आयुक्त के निर्देशों के बावजूद जानबूझकर या लापरवाही के चलते निर्धारित सांची पेड़े के स्थान पर बूंदी वितरित की गई, तो संबंधित जिम्मेदारों से जवाब-तलब कर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल मामला सामने आने के बाद अब नजर शिक्षा विभाग की अगली कार्रवाई पर है। क्या विभाग इस पूरे मामले की जांच कराएगा और जिम्मेदारी तय करेगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
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