चंबल में घुल रहा जहर: पीथमपुर की फैक्ट्रियों पर प्रदूषित पानी छोड़ने के आरोप, कलेक्टर ने जांच के दिए संकेत

धार/ घनश्याम पाटीदार: धार और इंदौर जिले की सीमा से होकर गुजरने वाली चंबल नदी इन दिनों प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रही है। आरोप है कि पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के सेक्टर नंबर-3 में संचालित कुछ फैक्ट्रियों से निकलने वाला कथित जहरीला और प्रदूषित पानी बारिश के दौरान नालों के जरिए चंबल नदी में पहुंच रहा है। इसके बाद नदी के पानी का रंग काला और गहरा हरा दिखाई देने लगा है।

बारिश का इंतजार करती हैं फैक्ट्रियां

स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ औद्योगिक इकाइयां बारिश के मौसम का इंतजार करती हैं। जैसे ही बारिश के कारण सूखी चंबल नदी में पानी का बहाव शुरू होता है, कथित तौर पर फैक्ट्रियों का प्रदूषित पानी नालों के माध्यम से नदी में छोड़ दिया जाता है।

इससे नदी के पानी की गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ने की बात सामने आई है। नदी में प्रदूषित पानी पहुंचने के बाद बड़ी संख्या में मछलियों और जलीय जीव-जंतुओं के मरने के भी आरोप लगाए जा रहे हैं।

जलीय जीवों के साथ गांवों पर भी संकट

चंबल नदी के प्रदूषण का असर केवल नदी तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। नदी के किनारे बसे कई गांवों के जलस्रोत भी प्रभावित होने की चिंता जताई जा रही है। ग्रामीणों के लिए नदी और उससे जुड़े जलस्रोत महत्वपूर्ण हैं, ऐसे में यदि प्रदूषण भूजल या अन्य स्रोतों तक पहुंचता है तो इसका व्यापक असर हो सकता है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले करीब तीन वर्षों से बारिश शुरू होते ही चंबल नदी में इसी तरह प्रदूषण की स्थिति देखने को मिल रही है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका पर सवाल उठते रहे हैं।

प्रशासन की निगरानी पर उठ रहे सवाल

मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि लगातार तीन वर्षों से नदी के प्रदूषित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो जिम्मेदार विभागों की ओर से अब तक स्थायी कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर पर्याप्त रूप से नहीं जा रहा है। वहीं, कथित रूप से प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

960 किलोमीटर लंबी है चंबल नदी

चंबल नदी का उद्गम इंदौर जिले के जानापाव क्षेत्र से माना जाता है। मध्य प्रदेश से निकलने के बाद यह राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कई जिलों से होकर गुजरती है। करीब 960 किलोमीटर लंबी चंबल नदी मध्य भारत की महत्वपूर्ण नदियों में शामिल है। नदी पर कई बड़े बांध भी बने हुए हैं।

ऐसे में नदी के शुरुआती हिस्से में होने वाला प्रदूषण आगे के क्षेत्रों को भी प्रभावित कर सकता है। यही वजह है कि चंबल में प्रदूषण का मामला केवल स्थानीय समस्या नहीं बल्कि पर्यावरण और जल सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन जाता है।

कलेक्टर ने जांच का दिया आश्वासन

मामले को लेकर जब धार कलेक्टर राजीव रंजन मीना से चर्चा की गई तो उन्होंने इसकी गंभीरता को समझते हुए जल्द ही एक जांच दल गठित करने की बात कही। कलेक्टर ने पूरे मामले की जांच कराने और तथ्य सामने लाने का आश्वासन दिया है।

अब निगाहें प्रशासन की जांच पर टिकी हैं। सवाल यही है कि चंबल नदी में प्रदूषित पानी पहुंचने के पीछे आखिर कौन जिम्मेदार है और जांच के बाद कथित रूप से दोषी फैक्ट्री संचालकों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

यह भी पढ़े: आधुनिक भारत के शिल्पकार राजीव गांधी: दूरदर्शी फैसलों ने रखी 21वीं सदी के भारत की नींव

 

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  • Manisha Gupta

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