
तेहरान: ऊर्जा संकट और आर्थिक प्रतिबंधों का सामना कर रहे ईरान के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान के दक्षिणी फार्स प्रांत में 212 अरब क्यूबिक मीटर से अधिक का विशाल प्राकृतिक गैस भंडार मिला है। ईरान के पेट्रोलियम मंत्री मोहसेन पाकनेजाद ने रविवार को सरकारी टेलीविजन से बातचीत के दौरान इस महत्वपूर्ण खोज की पुष्टि की।
कम लागत में तैयार होगी ‘स्वीट’ प्राकृतिक गैस
ईरान के पेट्रोलियम मंत्री मोहसेन पाकनेजाद के अनुसार, खोजे गए कुल 212 अरब क्यूबिक मीटर भंडार में से 160 अरब क्यूबिक मीटर से ज्यादा प्राकृतिक गैस निकाली जा सकती है। उन्होंने इस गैस को ‘स्वीट’ प्राकृतिक गैस करार दिया, जिसका अर्थ है कि इसमें हाइड्रोजन सल्फाइड की मात्रा बेहद कम है। इसके कम होने से गैस के उत्पादन, शोधन और विकास की लागत में काफी कमी आएगी।
पेट्रोलियम मंत्री ने बताया कि इस गैस क्षेत्र के तेजी से विकास और व्यावसायिक उत्पादन के लिए अधिकारियों ने आवश्यक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह खोज देश के ऊर्जा भविष्य के लिए एक बेहद मजबूत आधार साबित होगी। ईरान के लिए यह खोज बेहद रणनीतिक मानी जा रही है, क्योंकि उसका ऊर्जा क्षेत्र पिछले कई महीनों से बुनियादी ढांचों पर हुए अमेरिकी-इजरायली हमलों और कड़े अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रतिबंधों के दोहरे दबाव से जूझ रहा है।
‘एक बूंद तेल निर्यात नहीं होने देंगे’ – मोहसिन रेजाई की चेतावनी
इस बड़ी खोज के बीच, ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई ने अमेरिका को कड़ा संदेश जारी किया है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान के खिलाफ आर्थिक युद्ध जारी रहता है, तो होर्मुज स्ट्रेट या फारस की खाड़ी के किसी भी अन्य हिस्से से एक बूंद भी तेल का निर्यात नहीं होने दिया जाएगा। रेजाई ने स्पष्ट किया कि ईरानी जनता के खिलाफ अमेरिका द्वारा चलाए जा रहे आर्थिक युद्ध में किसी भी अन्य देश की भागीदारी या समर्थन को ईरान ‘युद्ध की कार्रवाई’ मानेगा।
ट्रंप की ‘आर्थिक डी-डे’ की धमकी के बाद बढ़ा तनाव
मोहसिन रेजाई का यह आक्रामक रुख अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों के बाद आया है। ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए कहा था कि ईरान को समर्थन देने वाले किसी भी देश के खिलाफ अब तक की सबसे कठोर आर्थिक कार्रवाई की जाएगी, जिससे अभूतपूर्व स्तर का आर्थिक अलगाव पैदा होगा। ट्रंप ने अपनी इस नीति को ‘आर्थिक डी-डे’ नाम दिया था।
MoU की समयसीमा समाप्त, वार्ता पर अनिश्चितता
उल्लेखनीय है कि 18 जून 2026 को अमेरिका और ईरान ने क्षेत्रीय संघर्षों और लेबनान सहित विभिन्न मोर्चों पर जारी तनाव को समाप्त करने के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत दोनों देशों को 60 दिनों के भीतर वार्ता पूरी कर एक अंतिम और स्थायी समझौते तक पहुंचना था। यह समयसीमा सोमवार को समाप्त हो गई है, लेकिन पिछले महीने दोनों देशों के बीच उपजे नए कूटनीतिक और सैन्य तनाव के कारण समझौते के भविष्य पर फिलहाल अनिश्चितता के बादल छाए हुए हैं।
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