
दमिश्क: सीरिया और इजरायल के बीच जारी तनाव को कम करने और सुरक्षा समझौते की दिशा में वार्ता को पुनर्जीवित करने के मकसद से जॉर्डन में अमेरिका की मध्यस्थता में एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में सीरिया और इजरायल के वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडलों ने हिस्सा लिया। सीरिया की सरकारी समाचार एजेंसी साना के अनुसार, यह बातचीत हाल के दिनों में सीरियाई क्षेत्र पर हुए इजरायली हमलों और दक्षिणी सीरिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बाद शांति स्थापित करने के प्रयासों के तहत बुलाई गई थी।
बैठक में शामिल प्रतिनिधिमंडल और प्रमुख मुद्दे
जॉर्डन में हुई इस बातचीत में सीरियाई प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व देश के विदेश मामलों के प्रमुख असाद अल-शैबानी ने किया, जिसमें सीरिया की सामान्य और सैन्य खुफिया एजेंसियों के शीर्ष प्रमुख भी शामिल थे। वहीं दूसरी ओर इजरायल का एक वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल मौजूद रहा। बैठक का मुख्य फोकस ऐसे व्यावहारिक कदम उठाने पर था, जिनसे इजरायल द्वारा किए जा रहे हमलों, गिरफ्तारियों और लक्षित सैन्य कार्रवाइयों को तुरंत रोका जा सके। इसके अलावा दोनों देश भविष्य में एक व्यापक सुरक्षा समझौते पर पहुंचने और द्विपक्षीय वार्ता की प्रक्रिया को पुनः शुरू करने पर सहमत दिखे।
सीरिया का कड़ा रुख: ‘संप्रभु अधिकारों से कोई समझौता नहीं’
वार्ता के दौरान सीरियाई प्रतिनिधिमंडल ने अपना रुख साफ करते हुए कहा कि सीरिया एक पूर्ण संप्रभु राष्ट्र है और उसे अपनी राष्ट्रीय सेना का पुनर्गठन एवं सुदृढ़ीकरण करने का पूरा अधिकार है। सीरिया ने यह भी स्पष्ट किया कि उसे अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय सहयोगी चुनने की पूरी स्वतंत्रता है और दमिश्क ऐसी किसी भी शर्त या व्यवस्था को स्वीकार नहीं करेगा जो उसके संप्रभु अधिकारों को सीमित करती हो।
साथ ही सीरिया ने इजरायल के कब्जे वाले गोलान हाइट्स को अपना अभिन्न अंग दोहराते हुए कहा कि इस क्षेत्र की अंतिम स्थिति पर बात करना अभी जल्दबाजी होगी। सीरिया की पहली प्राथमिकता यह है कि इजरायली सेना 8 दिसंबर 2024 से पूर्व की स्थितियों में वापस लौटे और 1974 के ‘डिसएंगेजमेंट समझौते’ को पूरी तरह से बहाल कर लागू किया जाए।
तुर्की-इजरायल तनाव कम करने की कोशिश
राजनयिक सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में तुर्की और इजरायल के बीच जारी मतभेदों और खींचतान को कम करने पर भी विचार-विमर्श किया गया, ताकि दोनों क्षेत्रीय ताकतों के बीच जारी तनाव का असर सीरिया की धरती पर न पड़े। गौरतलब है कि पिछले दिनों इजरायल ने उत्तर-पश्चिमी सीरिया के अबू अल-दुहूर सैन्य हवाई अड्डे पर यह दावा करते हुए हमला किया था कि दमिश्क वहां तुर्की सेना की तैनाती की तैयारी कर रहा है, हालांकि सीरिया और तुर्किये दोनों ही देशों ने इजरायल के इस दावे का पूरी तरह खंडन किया था।
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