
नई दिल्ली: अमेरिकी रक्षा कंपनी रेथियॉन द्वारा विकसित नई पीढ़ी की अति-घातक एयर-टू-एयर मिसाइल AIM-424 ‘मैलिस’ की आधिकारिक तस्वीरें और विवरण सामने आ गए हैं, जिससे रक्षा क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है। यह मिसाइल अमेरिकी सेना की एक बेहद महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसे खास तौर पर F-35 लाइटनिंग II और F-22 रैप्टर जैसे 5वीं और 6वीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट्स के आंतरिक वेपन्स बे में समाने के लिए डिजाइन किया गया है। 463 किलोमीटर (250 समुद्री मील) से अधिक की मारक क्षमता वाली यह मिसाइल अमेरिकी वायु सेना को लंबी दूरी के हवाई युद्ध में अभूतपूर्व बढ़त दिलाएगी। आधिकारिक तस्वीरों से पुष्टि हुई है कि F/A-18E सुपर हॉर्नेट और F-35C पर इसका सक्रिय उड़ान और फिटमेंट परीक्षण तेजी से चल रहा है।
AIM-424 मैलिस के सार्वजनिक होने के साथ ही पेंटागन के लगभग एक दशक पुराने गुप्त शोध कार्यक्रम ‘लॉन्ग-रेंज एंगेजमेंट वेपन’ का खुलासा हो गया है। हाल के वर्षों में चीन की PL-17 (500 किमी रेंज) और रूस की R-37M जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों के आने से अमेरिकी AWACS, टैंकर और जासूसी विमानों के लिए बड़ा खतरा पैदा हो गया था, जिसकी काट के रूप में मैलिस को तैयार किया गया है। 13.5 फीट लंबी और लगभग 680 किलोग्राम वजनी यह मिसाइल से तीन गुना भारी है, लेकिन अपने कॉम्पैक्ट डिजाइन और फोल्डिंग फिन्स के कारण यह फाइटर जेट्स के स्टील्थ (अदृश्यता) प्रोफाइल को नुकसान पहुंचाए बिना में आसानी से फिट हो जाती है।
तकनीकी रूप से यह मिसाइल बेहद उन्नत है और इसमें टू-स्टेज सॉलिड-प्रोपेलेंट रॉकेट मोटर का इस्तेमाल किया गया है। पहला बूस्टर इसे समताप मंडल में ले जाकर मैख 5 से अधिक की अत्यधिक तेज रफ्तार देता है, जबकि दूसरा बूस्टर लक्ष्य के करीब पहुंचकर फिर प्रज्वलित होता है ताकि दुश्मन का विमान बच न सके। चूंकि इतनी लंबी दूरी पर कोई भी अकेला रडार ट्रैकिंग नहीं रख सकता, इसलिए यह उपग्रहों, युद्धपोतों और विमानों के डेटा-लिंक नेटवर्क से जुड़ी रहती है, जबकि अंतिम क्षणों में निशाना साधने के लिए इसमें AESA रडार और इमेजिंग इंफ्रारेड सीकर मौजूद है जो दुश्मन की इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग को पूरी तरह बेअसर कर देता है।
सामरिक दृष्टि से यह मिसाइल t के लिए नहीं, बल्कि भारत-प्रशांत क्षेत्र में ‘किलिंग द आर्चर’ रणनीति के तहत बनाई गई है। इसका मुख्य उद्देश्य दुश्मन के H-6K जैसे बमवर्षक विमानों को एंटी-शिप मिसाइलें लॉन्च करने से 460 किमी दूर ही नष्ट करना और AWACS व ईंधन भरने वाले टैंकर विमानों को पीछे धकेलना है। मैलिस के शामिल होने से अमेरिकी सेना की मिसाइल त्रिमूर्ति AIM-260, AIM-424, और AIM-174B पूरी हो गई है, जिसने F-14 टॉमकैट और फीनिक्स मिसाइल के रिटायरमेंट के बाद पैदा हुए खालीपन को भर दिया है। परीक्षण के अंतिम चरण में होने के कारण इसके जल्द ही अमेरिकी नौसेना के बेड़ों में तैनात होने की संभावना है।
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