
सीहोर: जिले के बरखेड़ा कुर्मी स्थित उचित मूल्य दुकान से जुड़ा एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि दुकान पर पात्र हितग्राहियों को निर्धारित खाद्यान्न उपलब्ध कराने के बजाय नगद राशि वितरित की गई। मामला सामने आने के बाद सार्वजनिक वितरण प्रणाली और खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि राशन के बदले हितग्राहियों को नगद राशि दी गई, तो यह भुगतान किस शासकीय योजना, आदेश या प्रावधान के तहत किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें खाद्यान्न के स्थान पर पैसा दिए जाने की स्थिति में इस पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड स्पष्ट होना चाहिए। मामले में यह भी सवाल उठ रहा है कि यदि हितग्राहियों को राशन नहीं दिया गया, तो दुकान के स्टॉक का क्या हुआ और उनके हिस्से का खाद्यान्न कहां गया। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविक स्थिति विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
स्टॉक और पीओएस रिकॉर्ड की जांच जरूरी
पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए उचित मूल्य दुकान के स्टॉक रजिस्टर, वितरण रिकॉर्ड, पीओएस मशीन के डाटा और हितग्राहियों को कथित रूप से दी गई नगद राशि का मिलान किया जाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि दुकान पर खाद्यान्न का वास्तविक वितरण कितना हुआ और नगद भुगतान किस आधार पर किया गया।
सीहोर में फ्री राशन की जगह हितग्राहियों को बांटी गई नगद राशि? बरखेड़ा कुर्मी उचित मूल्य दुकान पर उठे गंभीर सवाल
मामला सामने आने के बाद अब नजर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति तथा संबंधित सहकारी विभाग की कार्रवाई पर है। यदि नियमों के विपरीत राशन के बदले नगद राशि वितरित किए जाने की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग उठ सकती है। पूरे मामले में विभागीय जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नगद राशि वितरण किस प्रावधान के तहत हुआ और खाद्यान्न वितरण की वास्तविक स्थिति क्या थी।
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