
सार
कुलदीप शर्मा|शिवपुरी जिले में राशन वितरण में अनियमितता, ऑनलाइन पोर्टल पर अतिरिक्त आवंटन दिखाकर बैलेंस बढ़ाने और खाद्यान्न गायब करने की शिकायतों को कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा ने गंभीरता से लिया है। दैनिक समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों पर संज्ञान लेते हुए कलेक्टर ने मामले की निष्पक्ष और गहन जांच के निर्देश दिए हैं। इसके लिए एसडीएम शिवपुरी आनंद सिंह राजावत की अध्यक्षता में चार सदस्यीय जांच दल गठित किया गया है, जिसे 15 दिनों के भीतर स्पष्ट अभिमत के साथ जांच रिपोर्ट सौंपनी होगी।
विस्तार
शिवपुरी। जिले में राशन वितरण व्यवस्था को लेकर सामने आई अनियमितताओं की शिकायतों पर जिला प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। शिकायतों में उचित मूल्य की दुकानों पर राशन वितरण में गड़बड़ी के साथ ऑनलाइन पोर्टल पर अतिरिक्त आवंटन दिखाकर बैलेंस बढ़ाने और खाद्यान्न गायब करने के आरोप लगाए गए हैं।
दैनिक समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों पर संज्ञान लेते हुए कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा ने मामले को गंभीरता से लिया और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं गहन जांच के निर्देश दिए। जांच के लिए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) शिवपुरी आनंद सिंह राजावत की अध्यक्षता में चार सदस्यीय दल का गठन किया गया है।
जांच दल में कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी जगदीप सिंह, जिला प्रबंधक लोक सेवा प्रबंधन रवि शर्मा और जिला आपूर्ति कार्यालय के सहायक ग्रेड-2 विपिन जैन को सदस्य बनाया गया है।
कलेक्टर ने जांच दल को राशन वितरण से जुड़े मामले के सभी तथ्यों की सूक्ष्म और तकनीकी जांच करने के निर्देश दिए हैं। जांच दल को उपलब्ध रिकॉर्ड, ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज आवंटन एवं वितरण से संबंधित जानकारी सहित प्रकरण के विभिन्न पहलुओं की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लानी होगी।
जांच दल को 15 दिवस के भीतर स्पष्ट अभिमत के साथ जांच प्रतिवेदन कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
इसके अलावा जांच दल से केवल अनियमितताओं की जांच तक सीमित न रहते हुए राशन वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने के संबंध में सुझाव भी मांगे गए हैं। दल यह सुझाव देगा कि जिले के पात्र हितग्राहियों को उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से समय पर और सुचारू रूप से खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा सके।
प्रशासन का उद्देश्य शिकायतों की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के साथ-साथ सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जवाबदेह बनाना है। अब जांच दल की रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि राशन वितरण और ऑनलाइन पोर्टल से संबंधित शिकायतों में कितनी वास्तविकता है और जिम्मेदारी किसकी तय होती है।
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