
सार
मध्य प्रदेश में तेज बारिश का दौर फिलहाल थम गया है और अगले तीन दिनों तक प्रदेश में भारी बारिश से राहत मिलने के आसार हैं। 10 सितंबर को किसी भी जिले में भारी बारिश का अलर्ट नहीं है, जबकि 11 सितंबर को उमरिया, मंडला, बालाघाट और डिंडौरी में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार 13 सितंबर से पश्चिमी मध्य प्रदेश में एक बार फिर बारिश का जोर बढ़ सकता है। प्रदेश में अब तक सामान्य से करीब 7 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।
विस्तार
मध्य प्रदेश में पिछले दिनों जारी तेज बारिश का दौर फिलहाल कमजोर पड़ गया है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में इस समय बारिश कराने वाली कोई मजबूत मौसम गतिविधि सक्रिय नहीं है। बुधवार को अधिकांश हिस्सों में धूप खिली रही और अगले तीन दिनों तक भी तेज बारिश से राहत मिलने की संभावना है। 10 सितंबर को प्रदेश के किसी भी जिले में भारी बारिश का अलर्ट जारी नहीं किया गया है। हालांकि कुछ स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है।
मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक फिलहाल प्रदेश में तेज बारिश के लिए अनुकूल मजबूत सिस्टम सक्रिय नहीं है। पश्चिमी हिस्से में एक चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है, लेकिन इसका प्रभाव अभी सीमित है। 13 सितंबर से पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश का नया दौर शुरू होने की संभावना है। भोपाल समेत कई शहरों में धूप निकलने से उमस बढ़ी है और गुरुवार को भी अधिकांश स्थानों पर मौसम इसी तरह रहने का अनुमान है।
हालांकि 11 सितंबर को उमरिया, मंडला, बालाघाट और डिंडौरी में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। ऐसे में इन जिलों में स्थानीय स्तर पर सतर्कता बनाए रखने की जरूरत होगी।
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बारिश के आंकड़ों की बात करें तो मध्य प्रदेश में सामान्य बारिश करीब 37.3 इंच है, जबकि अब तक प्रदेश में करीब 7 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। पिछले सप्ताह हुई अच्छी बारिश से खासकर पूर्वी मध्य प्रदेश की स्थिति में सुधार हुआ है। जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का आंकड़ा अब सामान्य के करीब पहुंच गया है।
इसके बावजूद प्रदेश के 32 जिलों में बारिश की कमी बनी हुई है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी समेत कई जिलों में सामान्य से 5 से 25 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है। पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में बारिश की कमी 7 से 55 प्रतिशत तक दर्ज की गई है।
दूसरी ओर प्रदेश के 23 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इनमें अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी शामिल हैं।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार जून में प्रदेश में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। इसके बाद जुलाई और अगस्त में अच्छी बारिश हुई, लेकिन जून की कमी पूरी तरह भर नहीं सकी। मानसून के दौरान दो बार बारिश का ब्रेक भी आया। अगस्त के आखिरी सप्ताह में हुई तेज बारिश से प्रदेश के बारिश के आंकड़ों में सुधार जरूर हुआ, लेकिन अब भी कुल बारिश सामान्य से करीब 7 प्रतिशत कम है।
फिलहाल प्रदेशवासियों को तीन दिनों तक तेज बारिश से राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन 13 सितंबर से पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश फिर जोर पकड़ सकती है। ऐसे में जिन जिलों में पहले से जलभराव या बाढ़ की स्थिति बनी हुई है, वहां प्रशासन और लोगों को मौसम के अगले अपडेट पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा।
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