
सार
ग्वालियर में जातिगत आरक्षण, UGC एक्ट 2026 और SC-ST एक्ट के प्रावधानों को लेकर सवर्ण संगठनों ने गुरुवार को प्रदर्शन किया। फूलबाग स्थित रानी लक्ष्मीबाई समाधि स्थल के सामने धरना और जनसभा आयोजित की गई। संगठनों ने आरक्षण का आधार आर्थिक करने, UGC एक्ट 2026 को वापस लेने और SC-ST एक्ट के प्रावधानों में बदलाव की मांग उठाई। प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई है।
विस्तार
ग्वालियर में आरक्षण और विभिन्न कानूनों से जुड़े मुद्दों को लेकर सवर्ण संगठनों का आंदोलन गुरुवार को तेज हुआ। संगठनों की ओर से पहले शहर बंद का आह्वान किया गया था। इसके बाद पुलिस और प्रशासन ने संगठन के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर प्रदर्शन के स्थान और व्यवस्था को लेकर चर्चा की। सहमति के बाद फूलबाग स्थित रानी लक्ष्मीबाई समाधि स्थल के सामने शांतिपूर्ण धरना और जनसभा की अनुमति दी गई।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग है कि आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की जाए और इसका आधार जाति के बजाय आर्थिक स्थिति को बनाया जाए। इसके साथ ही संगठन UGC एक्ट 2026 को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मौजूदा नीतियों से सामान्य वर्ग के युवाओं के शिक्षा और रोजगार के अवसर प्रभावित हो रहे हैं। संगठन आरक्षण व्यवस्था के मौजूदा स्वरूप में बदलाव की मांग कर रहे हैं।
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सवर्ण संगठनों ने SC-ST एक्ट में भी संशोधन की मांग उठाई है। उनका आरोप है कि कानून के कुछ प्रावधानों का दुरुपयोग होता है और वे चाहते हैं कि गिरफ्तारी से पहले निष्पक्ष जांच की व्यवस्था को मजबूत किया जाए। ये संगठन अपने आंदोलन को सामाजिक और नीतिगत बदलाव की मांग से जोड़कर देख रहे हैं। इन आरोपों और मांगों पर संबंधित कानूनों के तहत मौजूदा व्यवस्था अलग है और प्रदर्शनकारियों की आपत्तियां उनके अपने पक्ष के रूप में सामने आई हैं।
प्रदर्शन से पहले पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बैठक की थी। शहर बंद के आह्वान को देखते हुए महाराज बाड़ा, मुरार, हजीरा और अन्य प्रमुख बाजार क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। प्रशासन ने प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बनाए रखने की अपील की है।
आंदोलन से जुड़े नेताओं का कहना है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखा जाएगा। करणी सेना के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष राजा चौहान समेत अन्य पदाधिकारियों ने प्रशासन के साथ हुई बैठक के बाद शांतिपूर्ण प्रदर्शन की बात कही। संगठनों ने इसे व्यापक आंदोलन का शुरुआती चरण बताया है।
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