
सार
रूप कुमार हरबोल | सतना जिले के नागौद में पेयजल संकट के बीच नगर परिषद के मस्टर कर्मचारी एवं इंजीनियर शुभम सिंह के कथित बयान को लेकर सवाल उठे हैं। आरोप है कि उन्होंने 181 पर पेयजल समस्या की शिकायत करने वाले नागरिकों के घर टैंकर नहीं भेजने की बात कही। हालांकि, इस कथित बयान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वहीं मध्यप्रदेश की CM हेल्पलाइन 181 का आधिकारिक उद्देश्य नागरिकों की शिकायत, मांग और सुझाव दर्ज कर उन्हें संबंधित विभाग तक पहुंचाना है। ऐसे में नागरिक नगर परिषद से टैंकर आपूर्ति और 181 शिकायतों को लेकर स्पष्ट नियम और आधिकारिक जवाब की मांग कर रहे हैं।
विस्तार
सतना जिले के नागौद नगर में पेयजल संकट के बीच नगर परिषद की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। नगर में कई वार्डों के लोगों को पर्याप्त पेयजल नहीं मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इसी बीच नगर परिषद के मस्टर कर्मचारी एवं इंजीनियर शुभम सिंह का कथित बयान चर्चा में है।
स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों के मुताबिक, शुभम सिंह ने कथित तौर पर कहा कि यदि कोई नागरिक पेयजल समस्या को लेकर सरकारी हेल्पलाइन 181 पर शिकायत दर्ज कराता है तो उसके घर तक टैंकर के माध्यम से पानी नहीं पहुंचाया जाएगा। हालांकि, इस बयान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित कर्मचारी या नगर परिषद की ओर से इस संबंध में आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
पेयजल संकट से परेशान नागरिकों का कहना है कि कई वार्डों में पर्याप्त जलापूर्ति नहीं होने के कारण लोगों को दूसरे स्थानों से पानी लाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। ऐसे में टैंकर के जरिए राहत मिलने की उम्मीद रहती है। नागरिकों का सवाल है कि यदि कोई व्यक्ति अपनी पेयजल समस्या को लेकर सरकारी हेल्पलाइन पर शिकायत करता है तो केवल शिकायत दर्ज कराने के आधार पर उसे राहत से वंचित किया जा सकता है या नहीं।
मध्यप्रदेश की CM हेल्पलाइन 181 के आधिकारिक पोर्टल के अनुसार, इस सेवा पर नागरिक सरकारी योजनाओं की जानकारी, शिकायत, मांग और सुझाव दर्ज करा सकते हैं। हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों को संबंधित विभाग के अधिकारी के पास निराकरण के लिए भेजा जाता है।
पेयजल से जुड़ी शिकायतों के 181 के जरिए दर्ज होने के उदाहरण भी सरकारी पोर्टल पर उपलब्ध हैं। एक शिकायत में नगरीय विकास एवं आवास विभाग के तहत पेयजल आपूर्ति से संबंधित समस्या दर्ज हुई थी और संबंधित निकाय के अधिकारी को शिकायत के निराकरण की जिम्मेदारी दी गई थी।
इसी आधार पर नागौद के नागरिक यह जानना चाहते हैं कि नगर में पेयजल संकट के दौरान टैंकर उपलब्ध कराने के लिए नगर परिषद की क्या प्रक्रिया है और 181 पर शिकायत दर्ज होने के बाद राहत उपलब्ध कराने के संबंध में कोई निर्धारित नियम है या नहीं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शिकायत दर्ज कराना नागरिकों का अधिकार है और शिकायत मिलने के बाद संबंधित विभाग को समस्या का समाधान करने की प्रक्रिया अपनानी चाहिए। उनका कहना है कि पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा से जुड़ी शिकायतों के मामले में पारदर्शी व्यवस्था और स्पष्ट जानकारी जरूरी है।
अब मामले में नगर परिषद और संबंधित अधिकारियों के आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार है। यदि कर्मचारी के कथित बयान की पुष्टि होती है तो यह भी स्पष्ट करना होगा कि टैंकर से पेयजल आपूर्ति के लिए क्या नियम निर्धारित हैं और क्या 181 पर शिकायत करने वालों के लिए कोई अलग व्यवस्था लागू है। फिलहाल कथित बयान और उससे जुड़े आरोप जांच एवं आधिकारिक जवाब का विषय हैं।
- nagod-satna-water-crisis-181-complaint-tanker-controversy








