
सार
रानू परिहार | शिवपुरी जिले के करैरा की ग्राम पंचायत आवास में विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में वित्तीय अनियमितता के आरोप लगाए गए हैं। ग्राम आवास निवासी विवेक रायकरवार ने कलेक्टर को शिकायत देकर सीसी रोड, नाली, स्ट्रीट लाइट, चेकडैम, तालाब, कुआं, बाउंड्रीवाल समेत विभिन्न कार्यों की जांच और मौके पर भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है। शिकायत में कैशबुक, माप पुस्तिका, बिल-वाउचर, बैंक भुगतान, जियो-टैग फोटो और पीएम आवास योजना के हितग्राहियों की पात्रता की जांच का भी आग्रह किया गया है।
विस्तार
करैरा की ग्राम पंचायत आवास में पंचायत द्वारा कराए गए विभिन्न निर्माण एवं विकास कार्यों और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर शिकायत सामने आई है। ग्राम आवास निवासी विवेक रायकरवार ने जिला कलेक्टर से शिकायत कर मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। शिकायत की प्रतियां पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों सहित संबंधित अधिकारियों को भी भेजे जाने की बात कही गई है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि पंचायत के कुछ विकास कार्यों में अभिलेखों और ऑनलाइन पोर्टल पर भुगतान दर्शाया गया है, जबकि मौके पर संबंधित कार्य अपेक्षित गुणवत्ता या मात्रा के अनुरूप नहीं होने की आशंका है। शिकायत में सीसी रोड, नाली निर्माण, स्ट्रीट लाइट, खेल मैदान, चेकडैम, तालाब, हैंडपंप, कुआं निर्माण, चौपाल और चबूतरा, बाउंड्रीवाल, कूड़ादान, श्मशान और साफ-सफाई सहित विभिन्न कार्यों की जांच कराने की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता ने प्रत्येक कार्य की स्वीकृत राशि और वास्तविक खर्च का मिलान कराने के साथ माप पुस्तिका यानी एमबी, बिल-वाउचर, सामग्री खरीदी, मजदूरी भुगतान, जियो-टैग फोटो और कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र की जांच की मांग की है। साथ ही स्वतंत्र तकनीकी अधिकारी से मौके पर निर्माण कार्यों की माप कराकर रिकॉर्ड में दर्ज मात्रा से उसका मिलान कराने का आग्रह किया गया है।
प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों की पात्रता पर भी सवाल
शिकायत में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत लाभ लेने वाले हितग्राहियों की पात्रता की दोबारा जांच की मांग भी की गई है। शिकायतकर्ता ने कुछ ऐसे हितग्राहियों की पात्रता जांचने का आग्रह किया है, जिनके नाम पर पहले से भूमि दर्ज होने और अधिक भूमि होने की जानकारी सामने आने का दावा किया गया है। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि जांच में कोई हितग्राही योजना के निर्धारित नियमों के तहत अपात्र पाया जाता है, तो लाभ स्वीकृत करने की प्रक्रिया में शामिल संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए और अनियमितता प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
कैशबुक से बैंक भुगतान तक जांच की मांग
आवेदन में पंचायत के उपलब्ध अभिलेखों, कैशबुक, मस्टर रोल, माप पुस्तिका, बिल-वाउचर और बैंक भुगतान रिकॉर्ड का आपस में मिलान कराने की मांग की गई है। इसके साथ ही जियो-टैग तस्वीरों और मौके पर मौजूद निर्माण की स्थिति का भी तुलनात्मक परीक्षण कराने का आग्रह किया गया है।
शिकायतकर्ता ने जांच शुरू होने के साथ ही पंचायत के मूल अभिलेख सुरक्षित रखने की मांग की है। इनमें कैशबुक, मस्टर रोल, एमबी, बिल-वाउचर, बैंक भुगतान रिकॉर्ड, जियो-टैग फोटो और पीएमएवाई-जी से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं। उनका कहना है कि रिकॉर्ड सुरक्षित रहने से जांच प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जा सकेगी।
शिकायत में सात दिन के भीतर मूल एवं डिजिटल अभिलेख सुरक्षित करने, 15 दिन में मौके का प्रथम भौतिक निरीक्षण कराने और 30 दिन में प्राथमिक निष्कर्ष की लिखित जानकारी देने का प्रस्ताव रखा गया है। शिकायतकर्ता ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य बिना जांच किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि लगाए गए आरोपों और उपलब्ध रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराना है।
अब इस शिकायत पर जिला प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है और जांच में पंचायत के विकास कार्यों के रिकॉर्ड तथा धरातलीय स्थिति में कोई अंतर सामने आता है या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
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