
मध्य प्रदेश में वर्ष 2013 की आरक्षक भर्ती परीक्षा में हुए फर्जीवाड़े का मामला 13 साल बाद फिर सामने आया है। आरोप है कि जबलपुर के अभ्यर्थी विवेक सिंह ने अपनी जगह सॉल्वर को परीक्षा में बैठाया था और इसके बाद उसका चयन भी हो गया। अंगूठे के निशान के मिलान में गड़बड़ी सामने आने के बाद अब माढ़ोताल थाना पुलिस ने अभ्यर्थी और अज्ञात सॉल्वर के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
अपनी जगह सॉल्वर को बैठाकर दी परीक्षा
मामला अप्रैल 2013 में आयोजित आरक्षक चयन परीक्षा का है। जबलपुर जिले के माढ़ोताल क्षेत्र स्थित एक निजी कॉलेज को अभ्यर्थी विवेक सिंह का परीक्षा केंद्र बनाया गया था। आरोप है कि विवेक खुद परीक्षा देने के बजाय अपनी जगह एक सॉल्वर को परीक्षा में बैठाकर आया था।
परीक्षा के दौरान सॉल्वर के अंगूठे के निशान भी लिए गए थे। परीक्षा का परिणाम आने पर विवेक सिंह का चयन हो गया। उस समय यह फर्जीवाड़ा तत्काल कार्रवाई के स्तर तक नहीं पहुंच पाया।
अंगूठे के निशान से सामने आया राज
चयन प्रक्रिया के दौरान पुलिस मुख्यालय में अभ्यर्थी के अंगूठे के निशान लिए गए। जांच के दौरान इन निशानों को लेकर संदेह पैदा हुआ। इसके बाद विवेक सिंह को विशेष सशस्त्र बल की सागर स्थित 10वीं बटालियन भेजा गया, जहां उसके फिंगरप्रिंट की जांच कराई गई।
जांच में परीक्षा के दौरान ओएमआर शीट पर मिले अंगूठे के निशान और विवेक सिंह के वास्तविक अंगूठे के निशान का मिलान नहीं हुआ। इसके बाद आशंका मजबूत हुई कि भर्ती परीक्षा में अभ्यर्थी की जगह किसी दूसरे व्यक्ति यानी सॉल्वर ने परीक्षा दी थी।
13 साल बाद दर्ज हुई FIR
SAF की ओर से मामले में कानूनी कार्रवाई के लिए जबलपुर पुलिस को रिपोर्ट भेजी गई थी। इसके बाद माढ़ोताल थाना पुलिस ने सोमवार रात अभ्यर्थी विवेक सिंह और सॉल्वर के खिलाफ मामला दर्ज किया।
पुलिस ने परीक्षा अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है। हालांकि सॉल्वर की पहचान अभी सामने नहीं आई है। इसलिए FIR में उसे अज्ञात आरोपी बनाया गया है।
कौन था सॉल्वर? जांच में खुलेगा राज
माढ़ोताल थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह पंवार के मुताबिक अभी सॉल्वर की पहचान नहीं हो सकी है। पुलिस की जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि 2013 की परीक्षा में विवेक सिंह की जगह कौन व्यक्ति बैठा था।
सॉल्वर की पहचान सामने आने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस परीक्षा से जुड़े दस्तावेजों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर पूरे मामले की पड़ताल कर रही है।
13 साल की देरी पर भी उठ रहे सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि फर्जीवाड़े का पता चलने के बावजूद पुलिस कार्रवाई में करीब 13 साल क्यों लग गए। अंगूठे के निशान में अंतर सामने आने के बाद भी मामला इतने लंबे समय तक लंबित रहा।
माढ़ोताल थाना प्रभारी का कहना है कि पुलिस को SAF की ओर से कार्रवाई के लिए अब पत्र मिला है, जिसके आधार पर FIR दर्ज की गई है। सत्यापन प्रक्रिया में इतना लंबा समय क्यों लगा, इसकी जानकारी उनके पास नहीं है। पुलिस जांच के दौरान इस पहलू को भी देखा जाएगा।
अब जांच में क्या होगा?
FIR दर्ज होने के बाद पुलिस अब परीक्षा में सॉल्वर की भूमिका, अभ्यर्थी के साथ उसके संपर्क और फर्जी तरीके से चयन हासिल करने से जुड़े पहलुओं की जांच करेगी। सॉल्वर की पहचान होने के बाद मामले में आरोपियों की भूमिका और स्पष्ट हो सकेगी।
करीब 13 साल पुराने इस मामले में अब पुलिस की कार्रवाई से यह पता चलेगा कि परीक्षा में फर्जीवाड़ा किस तरह किया गया था और चयन प्रक्रिया के दौरान इसकी जानकारी सामने आने के बावजूद कार्रवाई में इतनी देरी क्यों हुई।
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