
उत्तर प्रदेश में लंबे समय से लंबित जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के आवेदनों को लेकर लोगों को राहत मिली है। दो साल से अधिक पुराने लंबित मामलों का निस्तारण नई व्यवस्था लागू होने तक पुरानी प्रक्रिया के तहत ही किया जाएगा। मेरठ में ऐसे 160 से अधिक मामले सामने आए हैं। शासन के निर्देश के बाद अब इन आवेदनों को एसडीएम स्तर पर सत्यापन कराकर प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया तेज की जा रही है।
जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए लंबे समय से सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे लोगों के लिए राहत की खबर है। उत्तर प्रदेश में दो वर्ष से अधिक समय से लंबित जन्म और मृत्यु पंजीकरण के आवेदनों को नई व्यवस्था लागू होने तक मौजूदा नियमों के तहत ही निस्तारित करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे उन लोगों को राहत मिलेगी, जिनके आवेदन नए नियमों को लेकर बनी प्रशासनिक स्थिति के कारण अटक गए थे।
नए नियम लागू होने से पहले पुरानी प्रक्रिया से होगा निस्तारण
भारत सरकार ने जन्म-मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में संशोधन किया है। नए प्रावधानों के तहत दो साल से अधिक देरी से किए जाने वाले जन्म या मृत्यु पंजीकरण के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के सत्यापन आदेश की आवश्यकता होगी। हालांकि, नई व्यवस्था से जुड़ी तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रिया अभी पूरी तरह शुरू नहीं हुई है।
इसी स्थिति को देखते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि संशोधित व्यवस्था लागू होने से पहले जो आवेदन लंबित हैं, उन्हें वर्तमान व्यवस्था के अनुसार ही निपटाया जाए। इससे पुराने आवेदनों को नई प्रक्रिया शुरू होने तक रोककर रखने की स्थिति खत्म होगी।
मेरठ में 160 से अधिक आवेदन लंबित
मेरठ में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए बड़ी संख्या में आवेदन आते हैं। नगर निगम के तीनों जोनल कार्यालयों में हर महीने औसतन करीब 4000 जन्म प्रमाण पत्र और 1000 मृत्यु प्रमाण पत्र के आवेदन आते हैं। इनमें 160 से अधिक मामले ऐसे हैं, जो दो वर्ष से अधिक देरी वाली श्रेणी में आते हैं।
नियमों में बदलाव और नई प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता नहीं होने के कारण इन मामलों के आवेदक परेशान थे। कई लोगों को बच्चों के स्कूल में दाखिले, सरकारी योजनाओं और दूसरे जरूरी दस्तावेजों के लिए जन्म प्रमाण पत्र की आवश्यकता थी। अब लंबित मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
एसडीएम स्तर पर होगा सत्यापन
अपर नगर आयुक्त पंकज कुमार सिंह के अनुसार, दो साल से अधिक देरी वाले आवेदन एसडीएम कार्यालय भेजे जा रहे हैं। वहां सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रमाण पत्र जारी किया जा रहा है। यह व्यवस्था नई प्रक्रिया के प्रभावी होने तक जारी रहेगी।
इसका मतलब है कि फिलहाल दो साल से पुराने आवेदकों को नए नियम के तहत न्यायिक मजिस्ट्रेट की प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। पुराने लंबित मामलों को मौजूदा व्यवस्था के अनुसार आगे बढ़ाया जाएगा।
1 अक्टूबर से बदल सकती है प्रक्रिया
जन्म-मृत्यु पंजीकरण से जुड़े संशोधित प्रावधानों को 1 अक्टूबर 2026 से लागू किए जाने की जानकारी सामने आई है। नए नियमों में देरी से पंजीकरण कराने वालों के लिए प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सख्त होगी। दो साल या उससे अधिक पुराने मामले में प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश की जरूरत होगी।
ऐसे में जिन लोगों के जन्म या मृत्यु का पंजीकरण लंबे समय से लंबित है, उनके लिए मौजूदा व्यवस्था में आवेदन का निस्तारण महत्वपूर्ण हो गया है। प्रशासन का प्रयास है कि नई व्यवस्था लागू होने से पहले लंबित मामलों को अनावश्यक रूप से लंबा न खींचा जाए।
लोगों को दफ्तरों के चक्कर से मिलेगी राहत
जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र आज कई जरूरी सरकारी और निजी कामों में इस्तेमाल होते हैं। जन्म प्रमाण पत्र स्कूल प्रवेश समेत कई दस्तावेजी प्रक्रियाओं में जरूरी होता है, जबकि मृत्यु प्रमाण पत्र संपत्ति, पेंशन, बैंक और अन्य कानूनी कार्यों में उपयोग किया जाता है।
ऐसे में लंबे समय तक आवेदन अटके रहने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। शासन के ताजा निर्देश के बाद पुराने लंबित आवेदनों को मौजूदा प्रक्रिया से निपटाने की व्यवस्था से आवेदकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
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