
महिला एवं बाल विकास विभाग अपने अधिकारियों-कर्मचारियों के ट्रांसफर और मनमानी के लिए खासा बदनाम है। इसका प्रमाण अभी हाल ही में सामने आया जब विभाग की आयुक्त निधि निवेदिता के खिलाफ विरोध खड़ा हो गया और उन्हें बदनाम करने की कोशिश की गई। दरअसल विभाग में एक ही स्थान पर कई साल से जमे अधिकारियों-कर्मचारियों को इधर से उधर करने के लिए आयुक्त ने उनका तबादला किया। फिर क्या था, विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उनके खिलाफ लामबंद हो गए। आरोप लगाया गया कि वे मनमानी कर रही हैं। आखिरकार सरकार ने उनका तबादला कर दिया।
लेकिन हैरानी की बात यह रही कि निधि निवेदिता को हटाने के बाद अब उनके कार्यकाल में जारी किए गए कई आदेश भी शासन ने निरस्त कर लिए हैं। निधि निवेदिता ने तीन सितंबर को विभाग में प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव करते हुए 14 अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली थीं। अब उनके आदेश को निरस्त कर दिया गया। विभाग की उप सचिव ने इसके आदेश जारी किए हैं। चर्चा यह भी है कि विभागीय मंत्री की विभाग में उतनी दिलचस्पी नहीं रहती है। इस कारण उनके ओएसडी द्वारा काम संभाल रहे हैं। इस कारण विभाग में मनमानी और बढ़ गई है।
प्रशासनिक हलकों में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर अधिकारियों-कर्मचारियों को एक ही स्थान पर लंबे समय तक जमे रहने से रोकने के लिए जब आयुक्त ने तबादले किए तो उनके खिलाफ ही विरोध क्यों खड़ा हुआ। आयुक्त के तबादले के बाद उनके कार्यकाल में किए गए प्रशासनिक बदलावों को निरस्त किए जाने से भी चर्चाओं को हवा मिली है। अब सवाल यह उठाया जा रहा है कि क्या एक महिला आईएएस अधिकारी के खिलाफ विभागीय स्तर पर विरोध और उसके बाद हुए घटनाक्रम के पीछे उन्हें बदनाम करने की कोई साजिश तो नहीं थी।
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