
बैठक में किसानों ने ई-टोकन व्यवस्था को सरल बनाने, खाद के पूरे स्टॉक को ऑनलाइन दर्ज करने और वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने निजी विक्रेताओं के पीओएस मशीन रिकॉर्ड का ई-टोकन डेटा से मिलान कर रिपोर्ट सार्वजनिक करने को कहा।
किसानों ने गांववार खाद वितरण रिकॉर्ड जारी करने, निजी दुकानों की नियमित जांच कराने और 2,000 रुपये या उससे अधिक कीमत पर DAP बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की। इसके साथ ही बागेरी डबल लॉक केंद्र पर अशिक्षित किसानों की सहायता के लिए सरकारी प्रतिनिधि नियुक्त करने और फर्जी टोकन की जांच करने की मांग रखी गई।
प्रदेश सरकार ने अगस्त में ई-विकास प्रणाली 2.0 लागू करने की घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य ई-टोकन और खाद वितरण की समस्याएं दूर करना था। हालांकि, फतेहगढ़ के किसानों की शिकायतों से स्पष्ट है कि वे स्थानीय स्तर पर व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं।
किसानों ने कहा कि 1 अक्टूबर को उनकी मांगों पर समाधान नहीं मिला तो वे फतेहगढ़ में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर सकते हैं।
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