MP की 4 और धरोहरें UNESCO की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल, अब 19 स्थल सूची में

मध्य प्रदेश की चार ऐतिहासिक धरोहरों को UNESCO की Tentative List में जगह मिली है। बाघ गुफाएं, गिन्नौरगढ़ किला, बटेश्वर-पदावली-ककरामठ मंदिर समूह और उदयगिरि गुफाओं के शामिल होने के बाद प्रदेश के कुल 19 स्थल इस सूची में हो गए हैं।

भोपाल, 29 सितंबर 2026। मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम मिला है। UNESCO की विश्व धरोहरों की Tentative List में प्रदेश के चार नए स्थलों को शामिल किया गया है। इनमें धार की बाघ गुफाओं की चित्रकारी, सीहोर क्षेत्र का गिन्नौरगढ़ किला, मुरैना का बटेश्वर-पदावली-ककरामठ मंदिर समूह और विदिशा की उदयगिरि गुफाएं शामिल हैं। इन चार स्थलों के जुड़ने के बाद मध्य प्रदेश के कुल 19 स्थल UNESCO की टेंटेटिव सूची में हैं।

बाघ गुफाओं से उदयगिरि तक, चार धरोहरों को मिली जगह

धार की बाघ गुफाएं प्राचीन बौद्ध शैल गुफाओं का समूह हैं। यहां मौजूद भित्तिचित्र उस दौर के सामाजिक जीवन और कलात्मक परंपरा की झलक देते हैं।

सीहोर क्षेत्र का गिन्नौरगढ़ किला गोंड स्थापत्य और पारंपरिक जल प्रबंधन से जुड़ी विशेषताओं के लिए जाना जाता है। पहाड़ी क्षेत्र में स्थित इस किले में प्राकृतिक सुरक्षा व्यवस्था के साथ जल संरचनाएं भी मौजूद हैं।

मुरैना का बटेश्वर-पदावली-ककरामठ मंदिर समूह चंबल क्षेत्र की ऐतिहासिक स्थापत्य परंपरा को दर्शाता है। वहीं विदिशा की उदयगिरि गुफाएं गुप्तकालीन कला, शिल्प और धार्मिक स्थापत्य के महत्वपूर्ण उदाहरणों में शामिल हैं। यहां प्रसिद्ध वराह प्रतिमा भी मौजूद है।

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पहले से 15 स्थल टेंटेटिव लिस्ट में शामिल

इन चार नए स्थलों से पहले मध्य प्रदेश के 15 स्थल UNESCO की Tentative List में शामिल थे। इनमें ग्वालियर किला, खूनी भंडारा, चंबल घाटी के शैल कला स्थल, भोजेश्वर महादेव मंदिर, रामनगर के गोंड स्मारक, धामनार का ऐतिहासिक समूह, भेड़ाघाट-लामेताघाट, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, ओरछा और मांडू के स्मारक सहित अन्य धरोहरें शामिल हैं। UNESCO के आधिकारिक रिकॉर्ड में भारत की Tentative List में 78 प्रविष्टियां दर्ज हैं।

मध्य प्रदेश के लिए यह उपलब्धि पर्यटन और विरासत संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, टेंटेटिव लिस्ट में शामिल होने के बाद भी किसी स्थल को सीधे UNESCO World Heritage Site का दर्जा नहीं मिलता। इसके लिए आगे विस्तृत नामांकन, मूल्यांकन और UNESCO की निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होती है।

मध्य प्रदेश की चार और ऐतिहासिक धरोहरों ने UNESCO की टेंटेटिव लिस्ट में जगह बनाकर विश्व धरोहर की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाया है। अब इन स्थलों के संरक्षण और आगे की नामांकन प्रक्रिया पर नजर रहेगी।

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Srota Swati Tripathy

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