
कृष्णपाल पाल | शिवपुरी/कोलारस, 7 अक्टूबर 2026। शिवपुरी जिले के कोलारस क्षेत्र में जमीन-जायदाद की खरीद-फरोख्त से जुड़ी कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि पहले से वित्तीय संस्था के पास बंधक संपत्ति को ऋणमुक्त बताकर बेच दिया गया। इस मामले में दो परिवारों के करीब 33 लाख रुपये फंसने का दावा किया जा रहा है। पीड़ितों ने पुलिस और प्रशासन से मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
उपलब्ध शिकायत संबंधी रिपोर्ट के अनुसार, कोलारस के ग्राम मंगरौला में करीब 800 वर्गफुट भूमि को लेकर अरविंद जैन और विष्णु जैन ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत की है। उनका आरोप है कि उन्होंने यह संपत्ति 13 लाख रुपये में खरीदी थी। बाद में उन्हें जानकारी मिली कि संपत्ति पहले से ही इंडिया शेल्टर फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड के पास ऋण के लिए बंधक थी।
ऋणमुक्त बताकर संपत्ति बेचने का आरोप
पीड़ितों के मुताबिक, संपत्ति खरीदने से पहले उन्हें जमीन ऋणमुक्त होने की जानकारी दी गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संपत्ति का अलग-अलग लोगों के बीच हस्तांतरण होने के बाद आखिरकार इसे अरविंद और विष्णु जैन को बेच दिया गया। शिकायत के अनुसार, संबंधित संपत्ति पहले से वित्तीय संस्था के पास बंधक थी और उस पर ऋण से जुड़ी कार्रवाई भी चल रही थी। खरीदारों का दावा है कि उन्हें इस स्थिति की जानकारी बाद में हुई।
मामले में उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, संबंधित संपत्ति का हस्तांतरण कई चरणों में हुआ था। अरविंद और विष्णु जैन ने इस पूरे लेन-देन की दस्तावेजों के आधार पर जांच कराने और आरोपित लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है।
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दूसरे परिवार के साथ भी ऐसी ही शिकायत
रिपोर्ट में हक्कीबाई चंदेल से जुड़े एक अन्य मामले का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि उन्हें भी ऋणमुक्त बताकर ऐसी संपत्ति बेची गई, जो पहले से बंधक थी। दोनों मामलों को लेकर पीड़ित परिवार आर्थिक नुकसान और संपत्ति विवाद की स्थिति में पहुंचने का दावा कर रहे हैं। पीड़ितों का आरोप है कि यदि संपत्ति पहले से बंधक थी तो उसके संबंध में खरीदारों को स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी गई। उनका कहना है कि दस्तावेजों और संपत्ति की स्थिति की जांच में कथित चूक की भी पड़ताल होनी चाहिए।
पटवारी और अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग
मामले को लेकर अधिवक्ता संजीव विलगेया ने कथित फर्जीवाड़े में राजस्व रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की प्रक्रिया की जांच की जरूरत बताई है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि संपत्ति वास्तव में बंधक थी तो उसके ऋण और बंधक की स्थिति के बावजूद आगे की खरीद-फरोख्त कैसे हुई। हालांकि, किसी अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत का आरोप फिलहाल जांच का विषय है। केवल शिकायत या आरोप के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता। पूरे मामले में संबंधित दस्तावेजों, रजिस्ट्री, राजस्व रिकॉर्ड, वित्तीय संस्था के रिकॉर्ड और भुगतान से जुड़े साक्ष्यों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
दोनों पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से कथित ठगी की जांच, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और अपनी रकम की वापसी की मांग की है। फिलहाल पुलिस की जांच और संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
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