
सरकार कोई टास्क दे और अफसर उसे पूरा न कर पाए, तो आमतौर पर उसकी नींद उड़ जाती है। हर सताने लगता है कि कहीं सरकार नाराज होकर विभाग ही न छीन ले। लेकिन मंत्रालय में एक प्रमुख सचिव साहब की कहानी कुछ उलट है। सरकार ने उन्हें प्रदेश स्तर का एक बड़ा टास्क सौंपा था, लेकिन साहब उसमें बुरी तरह पिछड़ गए। हैरानी की बात यह है कि न तो साहब परेशान हैं और न ही उनके चेहरे पर कोई शिकन दिखाई दे रही है। आखिरकार टास्क पूरा न होने के बावजूद साहब खुश क्यों हैं? इसकी वजह उनके विभाग का गणित बताया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, इस विभाग में काम का बोझ तो भरपूर है, लेकिन साहब को इसमें अपने मतलब का कोई फायदा नजर नहीं आता। दिनभर फाइलें निपटाओ, बैठकों में माथापच्ची करो और लक्ष्य पूरा करने के लिए दौड़भाग अलग। यानी मेहनत बेहिसाब और दाम के नाम पर कुछ नहीं! अब साहब को उम्मीद है कि प्रदेश स्तरीय टास्क में नाकामी के बाद सरकार उनसे यह विभाग लेकर किसी दूसरे अफसर को सौंप सकती है। साहब की नजर में यह नुकसान नहीं, बल्कि एक तरह से छुटकारा होगा।
आखिरकार साहब के पास एक दूसरा महत्वपूर्ण विभाग भी है, जहां उनके हिसाब से कामकाज का गणित बेहतर बैठता है। अब देखना यह है कि सरकार साहब की उम्मीद पूरी करती है या उन्हें इसी विभाग में काम करते रहने का फरमान सुनाती है। फिलहाल तो साहब के मन में यही चल रहा है कि टास्क पूरा नहीं हुआ तो क्या हुआ, शायद विभाग से छुटकारा ही मिल जाए!
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