मोहन यादव बोले- देश की फूड बास्केट बन रहा मध्य प्रदेश, सोयाबीन उत्पादन में 45% हिस्सेदारी

इंदौर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सोया सम्मेलन में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मध्य प्रदेश की कृषि और कृषि आधारित उद्योगों को लेकर सरकार की योजनाओं पर बात की। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की पहचान देश की खाद्य टोकरी के रूप में बन रही है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, देश के कुल सोयाबीन उत्पादन में प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 45 प्रतिशत है। उन्होंने प्रतिकूल मौसम और अल नीनो के प्रभाव के बावजूद सोयाबीन उत्पादन के शुरुआती आंकड़ों को उत्साहजनक बताया।

सोयाबीन उत्पादन में मध्य प्रदेश की बड़ी भूमिका

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश देश के प्रमुख सोयाबीन उत्पादक राज्यों में शामिल है। मालवा क्षेत्र को सोयाबीन की राजधानी के रूप में पहचान मिलने का भी उन्होंने उल्लेख किया। उनके अनुसार, प्रदेश में कृषि के साथ कृषि आधारित उद्योग और खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष बारिश में कमी और अल नीनो जैसी मौसमी चुनौतियां सामने आईं, लेकिन किसानों ने परिस्थितियों के बीच बेहतर उत्पादन का प्रयास किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शुरुआती आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में सोयाबीन का उत्पादन उत्साहजनक रहने की उम्मीद है।

कृषि के साथ उद्योग और खाद्य प्रसंस्करण पर जोर

मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार कृषि के साथ खाद्य प्रसंस्करण, उद्योग और अन्य क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने दावा किया कि बिजली, जमीन और पानी जैसी सुविधाओं की उपलब्धता मध्य प्रदेश को निवेश के लिए अनुकूल बनाती है।

सरकार कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण और उनसे जुड़े उद्योगों के विस्तार पर भी जोर दे रही है। इससे किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर बाजार मिलने और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद जताई गई है। इससे पहले मुख्यमंत्री कृषि, व्यापार और उद्योग को एक मंच पर लाकर नया विकास मॉडल तैयार करने की बात भी कह चुके हैं।

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जबलपुर-भोपाल-इंदौर औद्योगिक गलियारे को मंजूरी

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए जबलपुर, भोपाल और इंदौर को जोड़ने वाले नए औद्योगिक गलियारे का भी उल्लेख किया। सरकार के अनुसार, इस गलियारे से औद्योगिक निवेश को गति मिल सकती है और रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

इंदौर में आयोजित सोया सम्मेलन में देश-विदेश के 500 से अधिक प्रतिनिधियों, कृषि वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और किसानों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन का उद्देश्य सोयाबीन और खाद्य तेल क्षेत्र के भविष्य, घरेलू उत्पादन और वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति को लेकर चर्चा करना है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव का जोर मध्य प्रदेश को कृषि उत्पादन के साथ खाद्य प्रसंस्करण और कृषि आधारित उद्योगों का बड़ा केंद्र बनाने पर है। सोयाबीन उत्पादन में प्रदेश की बड़ी हिस्सेदारी और नए औद्योगिक गलियारे को सरकार इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है।

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