
भोपाल। मध्यप्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को विकसित करने की तैयारी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि श्रीकृष्ण के जीवन और विचारों पर गहन शोध करने वाले शोधार्थियों और संस्थाओं को राज्य सरकार पूरा सहयोग देगी। साथ ही प्रदेश में श्रीराम वन गमन पथ की तर्ज पर श्रीकृष्ण पाथेय के माध्यम से संबंधित स्थलों को तीर्थ के रूप में विकसित किया जा रहा है।
श्रीकृष्ण के जीवन पर शोध को मिलेगा प्रोत्साहन
भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय एचआर-सीएसआर सम्मेलन ‘अभ्युदय-2026’ के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन समाज के लिए प्रेरणादायक है। उनके जीवन से लोकतांत्रिक व्यवस्था, सामाजिक समरसता, उद्यमशीलता, मित्रता, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा जैसे मूल्यों की सीख मिलती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े प्रसंगों और उनके विचारों पर देशभर में चर्चा तथा शोध को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इसी दिशा में शोधार्थियों और संस्थाओं को सरकार की ओर से सहयोग देने की बात कही गई है।
श्रीराम वन गमन पथ की तर्ज पर विकसित होंगे धार्मिक स्थल
मुख्यमंत्री के मुताबिक मध्यप्रदेश में भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण से जुड़े स्थलों को धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान देने के लिए विकास कार्य किए जा रहे हैं। श्रीराम वन गमन पथ और श्रीकृष्ण पाथेय के माध्यम से इन स्थलों को तीर्थ के रूप में विकसित करने की योजना पर काम हो रहा है।
संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव और श्रीकृष्ण पाथेय न्यास के न्यासी सचिव शिवशेखर शुक्ला ने भी विरासत संरक्षण से जुड़ी योजनाओं की जानकारी दी। उनके अनुसार चित्रकूट, ओंकारेश्वर और श्रीकृष्ण से जुड़े स्थलों के संरक्षण से धार्मिक पर्यटन और ऐतिहासिक विरासत को बढ़ावा मिल सकता है।
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श्रीकृष्ण और सुदामा के प्रसंग से सामाजिक समरसता का संदेश
मुख्यमंत्री ने श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े कई प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने सत्ता की बजाय जिम्मेदारी और कर्तव्य को महत्व दिया। उन्होंने कंस वध के बाद स्वयं सत्ता संभालने के बजाय व्यवस्था को आगे बढ़ाने का उदाहरण दिया।
मुख्यमंत्री ने श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों ने उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में साथ शिक्षा प्राप्त की थी। इस प्रसंग को उन्होंने सामाजिक समानता और समरसता का उदाहरण बताया।
धार्मिक विरासत के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा देने की तैयारी
मध्यप्रदेश सरकार की इस पहल में धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ पर्यटन की संभावनाओं को बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। ओंकारेश्वर में एकात्म धाम को भी इसी दिशा में किए गए प्रयास के रूप में बताया गया।
‘अभ्युदय-2026’ सम्मेलन में उद्योग, कौशल विकास, सामाजिक जिम्मेदारी और भारतीय ज्ञान परंपरा जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। सम्मेलन का आयोजन मध्यप्रदेश शासन, श्रीकृष्ण पाथेय न्यास और यूनाइटेड काउंसिल फॉर एंशिएंट विजडम के सहयोग से किया जा रहा है। कार्यक्रम 25 अक्टूबर तक चलेगा।
मध्यप्रदेश में श्रीकृष्ण से जुड़े स्थलों के विकास और उनके जीवन-दर्शन पर शोध को बढ़ावा देने की पहल धार्मिक विरासत के संरक्षण के साथ पर्यटन और सांस्कृतिक अध्ययन के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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