MP का अगला ‘किंगमेकर’ कौन? क्या डॉ. राजेश राजोरा बनेंगे मुख्य सचिव या मोदी-शाह की ‘प्रयोगशाला’ से निकलेगा कोई चौंकाने वाला नाम?

भोपाल: मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों सिर्फ मंत्रियों के विभागों की ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक मुखिया यानी मुख्य सचिव (Chief Secretary) की कुर्सी को लेकर भी भारी सस्पेंस बना हुआ है। सवाल यह है कि क्या मुख्यमंत्री मोहन यादव अपने खासकहे जाने वाले डॉ. राजेश राजोरा (ACS) पर दांव लगाएंगे, या फिर दिल्ली दरबार यानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की जोड़ी किसी ऐसे चेहरे को सामने लाएगी जिसकी कल्पना अभी किसी ने नहीं की है।

राजेश राजोरा: क्या खासहोना ही काफी है?

डॉ. राजेश राजोरा (1990 बैच के IAS) वर्तमान में मुख्यमंत्री के बेहद करीबी माने जाते हैं। उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में अहम जिम्मेदारी दी गई थी। और उनकी गिनती एक रिजल्ट ओरिएंटेडअफसर के रूप में होती है। प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि मोहन यादव अपनी टीम के इस सबसे मजबूत स्तंभ को सूबे की ब्यूरोक्रेसी की कमान सौंपना चाहते हैं। लेकिन इतिहास गवाह है कि मध्य प्रदेश में मुख्य सचिव का चयन सिर्फ राज्य की पसंद तक सीमित नहीं रहता।

दिल्ली की प्रयोगशालाऔर चौंकाने वालेफैसले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की कार्यशैली को जो लोग जानते हैं, वे इस बात से वाकिफ हैं कि वे ब्यूरोक्रेसी की नई प्रयोगशाला में नए प्रयोग करने के लिए जाने जाते हैं। जिस तरह उन्होंने मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री के रूप में मोहन यादव का नाम लाकर सबको चौंका दिया था, ठीक वैसा ही कोई प्रयोग मुख्य सचिव के पद पर भी संभव है।

  • सस्पेंस: क्या वर्तमान मुख्य सचिव अनुराग जैन (जिन्हें केंद्र और राज्य दोनों का भरोसा प्राप्त है) के कार्यकाल के बाद कोई नया सरप्राइजमिलेगा?
  • दबदबा: क्या इस बार मोहन यादव अपनी पसंद चलाने में कामयाब होंगे या दिल्ली से सीधे आदेश आएंगे?

नंबर 1 और नंबर 2 की पसंद पर टिका भविष्य

देश के नंबर वनऔर नंबर टूकहे जाने वाले मोदी-शाह की जोड़ी अक्सर वरिष्ठता के साथ-साथ डिलीवरीऔर फ्यूचर विजनको प्राथमिकता देती है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि वह किसी ऐसे चेहरे को लाएंगे जो 2028 के चुनाव तक लंबी पारी खेल सके, या फिर राजोरा जैसे अनुभवी और सीएम के विश्वासपात्र को कमान सौंपी जाएगी।

मध्य प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में इस समय वेट एंड वॉचकी स्थिति है। डॉ. राजेश राजोरा का पलड़ा भारी जरूर दिख रहा है, लेकिन जब तक दिल्ली से हरी झंडी नहीं मिलती, तब तक कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।

  • Gaurav Singh

    Gaurav Singh

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