राजभवन की ‘लाल कालीन’ और उच्च शिक्षा का संकट: क्या केवल सिकल सेल तक सीमित है राज्यपाल की सक्रियता?

भोपाल। मध्य प्रदेश के राजभवन की भव्यता और वहां बिछी ‘लाल कालीन‘ अक्सर चर्चा का विषय रहती है, लेकिन सवाल अब उस कालीन पर बैठे महामहिम राज्यपाल मंगुभाई पटेल की प्राथमिकताओं पर उठने लगे हैं। क्या राज्यपाल के लिए उच्च शिक्षा में सुधार का अर्थ केवल सिकल सेल एनीमिया के शिविरों तक सीमित है? या फिर प्रदेश के लाखों युवाओं का भविष्य, जो UGC के नए नियमों की भेंट चढ़ रहा है, उनकी चिंता का विषय बनेगा?

UGC के ‘श्रवण विरोधी‘ नियम और राज्यपाल की चुप्पी

वर्तमान में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के कई नए नियमों को लेकर प्रदेश के शैक्षणिक गलियारों में भारी आक्रोश है। शिक्षाविदों का एक बड़ा वर्ग इन नियमों को ‘श्रवण विरोधी‘ और वंचित वर्गों के हितों के खिलाफ मान रहा है। सवाल यह है कि क्या राज्यपाल मंगुभाई पटेल इन विसंगतियों पर UGC के खिलाफ खड़े होने का साहस दिखाएंगे? या फिर केंद्र द्वारा थोपे गए इन नियमों को मूक सहमति देकर प्रदेश में जातिगत और शैक्षणिक बंटवारे को बढ़ावा देंगे?

सिकल सेल से आगे क्यों नहीं बढ़ पा रही दृष्टि?

इसमें कोई दो राय नहीं है कि सिकल सेल एनीमिया एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जिस पर राज्यपाल का विशेष ध्यान रहा है। किंतु, एक संवैधानिक प्रमुख के नाते उनकी जिम्मेदारी केवल स्वास्थ्य जागरूकता तक सीमित नहीं है। मध्य प्रदेश की उच्च शिक्षा की स्थिति इस समय नाजुक मोड़ पर है:

●     रिक्त पद: विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के हजारों पद खाली हैं।

●     आरक्षण का मुद्दा: नियुक्तियों में रोस्टर प्रणाली और आरक्षण को लेकर लगातार विवाद हो रहे हैं।

●     छात्रों का भविष्य: क्या राज्यपाल यह सुनिश्चित कर पाएंगे कि सभी जातियों के छात्रों के साथ न्याय हो?

संवैधानिक पद और जातिगत निष्पक्षता की कसौटी

जनता के बीच यह सवाल गहराई से पैठ बना रहा है कि क्या राज्यपाल की नजर में सभी जातियां एक समान हैं? यदि हाँ, तो उच्च शिक्षा के उन निर्णयों पर हस्तक्षेप क्यों नहीं हो रहा जो पिछड़े और दलित वर्ग के छात्रों को हाशिए पर धकेल रहे हैं। राजभवन को यह सिद्ध करना होगा कि वह केवल प्रतीकात्मक राजनीति का केंद्र नहीं है, बल्कि प्रदेश के हर छात्र के शैक्षणिक अधिकारों का रक्षक है।

राजभवन की गरिमा केवल प्रोटोकॉल से नहीं, बल्कि जनहित के कठोर फैसलों से बढ़ती है। अब देखना यह है कि राज्यपाल महोदय सिकल सेल के दायरे से बाहर निकलकर शिक्षा सुधार के लिए कोई ठोस कदम उठाते हैं या ‘लाल कालीन‘ की शांति बनी रहती है

  • gaurav singh rajput

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