महा-मंथन: क्या यूपी में ‘ब्राह्मण बनाम सत्ता’ की जंग शुरू हो गई है?

सत्ता की हनक या जाति का दंश?’… क्या योगी राज में हाशिए पर हैचाणक्य‘? यूपी की सियासत में सुलगता सबसे बड़ा सवाल!

उत्तर प्रदेश की राजनीति उस मुहाने पर आकर खड़ी हो गई है, जहाँभयऔरभरोसेके बीच की लकीर धुंधली पड़ती जा रही है। सवाल तीखा है, सवाल कड़वा है, लेकिन क्या सवाल जायज है? गलियारों में चर्चा आम हैक्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि केवल एकखासवर्ग के रक्षक की बन चुकी है? क्याबुलडोजरका रुख मुड़ते ही जाति का चश्मा चढ़ जाता है?

आज उत्तर प्रदेश का ब्राह्मण समाज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है या यह केवल एक सुनियोजित राजनीतिक विमर्श है? आइए जानते हैं इस सुलगती चिंगारी के पीछे का पूरा सच।

सवालों के घेरे मेंमहाराज‘: क्या ठाकुरवाद की भेंट चढ़ रहा है ब्राह्मण सम्मान?

विपक्ष और समाज के एक बड़े वर्ग का आरोप है कि प्रदेश मेंठाकुरवादका बोलबाला है। एनकाउंटर की लिस्ट हो या थानों की पोस्टिंग, उंगलियां बारबार एक ही दिशा में उठ रही हैं।

     शंकराचार्य का अपमान या वैचारिक मतभेद?

जिस तरह से धार्मिक आयोजनों और निर्णयों में पूज्य शंकराचार्य की अनदेखी या उनके प्रति कड़ा रुख अपनाया गया, उसने सनातन के रक्षकों के मन में गहरी फांस पैदा कर दी है।

     पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल: विकास दुबे कांड से लेकर हालिया छोटीछोटी घटनाओं तक, क्या पुलिस केवल ब्राह्मणों को ही अपना निशाना बना रही है? ‘ठोक दोकी नीति में क्या जाति देखकर ट्रिगर दबाया जा रहा है?

इतिहास गवाह है, जबजब ब्राह्मण विचलित हुआ है, सत्ता के सिंहासन डोल गए हैं। क्या भाजपा उसपरशुरामके क्रोध को भूल रही है जिसने कभी उसे शिखर पर पहुँचाया था?” — राजनीतिक विश्लेषक

क्या बीजेपी के लिएआत्मघातीसाबित होगा ब्राह्मण विरोध?

उत्तर प्रदेश की सत्ता का रास्ता ब्राह्मणों के आशीर्वाद के बिना तय नहीं होता। अगर यह नाराजगी हकीकत है, तो 2027 का रास्ता भाजपा के लिए कांटों भरा हो सकता है।

     सरकार गिरने का डर: क्या ब्राह्मणों का असंतोष भीतरघात में बदलेगा?

     नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट: क्या दिल्ली दरबार ब्राह्मणों के मानसम्मान के लिएबलिमांग सकता है?

     विपक्ष की गिद्ध दृष्टि: सपा और बसपा इसब्राह्मण कार्डको लपकने के लिए तैयार बैठे हैं।

क्या यह अंत है या नई क्रांति की शुरुआत?

योगी आदित्यनाथ की छवि एककठोर प्रशासककी है, लेकिन राजनीति भावनाओं का खेल है। यदि ब्राह्मणों की आह और पुलिसिया तंत्र का कथित उत्पीड़न इसी तरह बढ़ता रहा, तो क्या उत्तर प्रदेश मेंभगवाके भीतर ही बगावत का बिगुल फूंका जाएगा? क्या मुख्यमंत्री अपनी कार्यशैली बदलेंगे या भाजपा किसी ब्राह्मण चेहरे को आगे कर डैमेज कंट्रोल करेगी?

यह केवल सत्ता का संघर्ष नहीं है, यह पहचान की लड़ाई है। उत्तर प्रदेश की धरती अब एक नए सियासी संग्राम की गवाह बनने वाली है। क्या योगी अपना किला बचा पाएंगे याचाणक्यअपनी शिखा खोलकर नंद वंश की तरह इस साम्राज्य का अंत कर देगा? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

  • Gaurav Singh

    Gaurav Singh

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