
प्रदेश की नौकरशाही में एक प्रमोटी IAS अधिकारी के बदले व्यवहार को लेकर इन दिनों व्यापक चर्चा चल रही है। पुलिस सेवा से IAS बनी इस अधिकारी को तेज-तर्रार और निर्णय क्षमता वाली अफसर माना जाता रहा है, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने उनके और एक वरिष्ठ IAS अधिकारी के बीच संबंधों में आई दूरी को उजागर कर दिया है। बताया जाता है कि दोनों के बीच पहले से ही सहज संवाद नहीं था और एक बार मामला उच्च स्तर तक भी पहुंच चुका है, जिससे रिश्तों में खटास स्थायी हो गई।
सूत्रों के अनुसार, वरिष्ठ अधिकारी लंबे समय से मुख्य सचिव स्तर की संभावित दौड़ में माने जाते रहे हैं, लेकिन प्रमोटी IAS अधिकारी के साथ उनके समीकरण कभी सहज नहीं बने। दोनों के बीच अधिकार क्षेत्र, निर्णय शैली और कार्य पद्धति को लेकर मतभेद की चर्चा रही है। प्रशासनिक हलकों का कहना है कि यह टकराव केवल व्यक्तित्व का नहीं बल्कि पदानुक्रम और सेवा पृष्ठभूमि के अंतर का भी प्रतीक माना जा रहा है—जहां एक ओर करियर IAS पृष्ठभूमि है, वहीं दूसरी ओर प्रमोटी अधिकारी की अलग सेवा यात्रा।
हाल ही में एक सामाजिक कार्यक्रम में घटी घटना ने इस दूरी को सार्वजनिक चर्चा का विषय बना दिया। बताया जा रहा है कि कार्यक्रम में वरिष्ठ IAS अधिकारी मौजूद थे, लेकिन प्रमोटी IAS मैडम ने उनसे औपचारिक मुलाकात या अभिवादन तक नहीं किया। इसे कई अधिकारियों ने शिष्टाचार की अनदेखी के रूप में देखा, खासकर तब जब कार्यक्रम में जूनियर अधिकारी स्वयं आगे बढ़कर वरिष्ठों का सम्मान कर रहे थे। इस घटना के बाद नौकरशाही में यह सवाल उठने लगा कि क्या पदोन्नति के बाद उनके व्यवहार में बदलाव आया है।







