भक्ति और शक्ति का संगम: चंद्र ग्रहण के साये में होलिका दहन, प्रभु भक्ति से काटें संकट के घेरे

विशेष डेस्क आगामी 3 मार्च 2026 को फाल्गुन पूर्णिमा के पावन अवसर पर अधर्म पर धर्म की विजय का पर्व ‘होलिका दहन‘ मनाया जाएगा। किंतु, इस वर्ष यह पर्व एक विशेष खगोलीय और आध्यात्मिक परिस्थिति में आ रहा है। इस दिन पूर्ण चंद्र ग्रहण का योग बन रहा है। जब प्रकृति अपनी लीला दिखाती है, तब केवल ईश्वर की शरण ही मनुष्य का कल्याण करती है। शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण काल में किया गया जप और प्रभु का स्मरण अनंत गुना फलदायी होता है।

आइए जानते हैं, इस चुनौतीपूर्ण समय में कैसे हम अपनी भक्ति से श्री हरि और महादेव को प्रसन्न कर सकते हैं।

॥ सूतक और पूजा का विधान ॥

3 मार्च को ग्रहण लगने के कारण सूतक काल का प्रभाव रहेगा। शास्त्रों की मान्यता है कि सूतक काल में मूर्तियों का स्पर्श वर्जित होता है, किंतु मानस पूजा और नाम जप का द्वार सदैव खुला रहता है।

●     होलिका पूजन: ग्रहण शुरू होने से पूर्व ही होलिका पूजन संपन्न कर लें। शुद्ध चित्त से प्रहलाद की भक्ति का स्मरण करें।

●     प्रभु को अर्पण: अपनी समस्त चिंताओं को भगवान विष्णु के चरणों में समर्पित कर दें। याद रखें, भक्त प्रहलाद को अग्नि नहीं जला पाई थी, वैसे ही ईश्वर की कृपा आपको ग्रहण के दोष से मुक्त रखेगी।

॥ क्या करें: भक्ति का मार्ग ॥

ग्रहण काल वह समय है जब बाहरी जगत अंधकारमय होता है, लेकिन अंतर्मन को राम–नाम की ज्योति से प्रकाशित किया जा सकता है।

  1. मंत्र जाप: ग्रहण के दौरान मौन रहकर मन ही मन मंत्रों का उच्चारण करें। यह समय मंत्र सिद्धि के लिए सर्वोत्तम है। 
  1. दान का संकल्प: ग्रहण समाप्त होने के उपरांत अपनी सामर्थ्य अनुसार तिल, गुड़, वस्त्र या अनाज का दान करें।
  1. गंगा जल का प्रयोग: शुद्धि के लिए पूरे घर में गंगा जल का छिड़काव करें और स्वयं भी स्नान के पश्चात प्रभु की आरती करें।

॥ किन चीजों से बचें: संयम की पराकाष्ठ ॥

ईश्वर के प्रति समर्पण का अर्थ है अनुशासन। ग्रहण के समय निम्न बातों का ध्यान रखें:

●     क्रोध और कलह: इस पावन दिन किसी के प्रति कटु वचन न बोलें। विवादों से दूर रहकर केवल “हरि नाम” का सहारा लें।

●     भोजन: सूतक काल में भोजन बनाने और खाने से बचें (बुजुर्गों, बच्चों और बीमारों को छोड़कर)। भोजन के पात्रों में पहले ही कुशा या तुलसी दल डाल दें।

●     निद्रा का त्याग: ग्रहण के समय सोना वर्जित है। इसके बजाय प्रभु की महिमा का गुणगान करें।

॥ सिद्ध मंत्र: जिनका करना है जाप ॥

इस दिन अपनी राशि और कष्टों के निवारण के लिए इन दिव्य मंत्रों का आश्रय लें:

श्री विष्णु मंत्र: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय (यह मंत्र हर संकट से रक्षा करेगा)।

महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्… (चंद्र दोष और शारीरिक कष्टों के लिए)।

शांति मंत्र: ॐ सों सोमाय नमः (चंद्र देव की कृपा प्राप्ति हेतु)।

हनुमान चालीसा: नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति के लिए बजरंगबली का पाठ सर्वोपरि है।

भक्ति भाव का संदेश

भक्तों, चंद्र ग्रहण केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि अपनी श्रद्धा को परखने का अवसर है। जिस प्रकार अग्नि ने प्रहलाद का बाल भी बांका नहीं किया, उसी प्रकार आपकी अनन्य भक्ति इस ग्रहण के प्रभाव को निष्फल कर देगी। अपनी आत्मा को उस परमपिता परमेश्वर में विलीन कर दें।

“श्रद्धा रखिये, क्योंकि जो नारायण के शरण में है, उसका अमंगल कभी नहीं हो सकता।“

  • gaurav singh rajput

    gaurav singh rajput

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