IAS साहब की ‘स्मार्ट’ रिश्वत: नकद नहीं, अब नेटफ्लिक्स और जिम मेंबरशिप से होगा काम!

प्रशासनिक गलियारों का ‘OTT’ तड़का: साहब को कैश से परहेज है, उन्हें तो बस मनोरंजन और फिटनेस काक्रेजहै! एक नएनवेले IAS साहब कीडिजिटल डिमांडने विभाग के इंजीनियरों के पसीने छुड़ा दिए हैं। मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और लोग कह रहे हैंसाहब तो बड़े ही आधुनिक निकले!”

पूरी कहानी: ‘सेवाका आधुनिक अवतार

हाल ही में सीधे भर्ती (Lateral Entry) से सचिव स्तर पर आए एक आईएएस साहब ने अपनी नई पोस्टिंग संभाली। विभाग के एक अनुभवी इंजीनियर साहब अपनीपरंपरागतआदत के अनुसारसौजन्य भेंटकरने पहुंचे और बड़े अदब से बोलेसर, सेवा का मौका दीजिए।

साहब ने भी देर नहीं की और फौरनडिजिटल सेवाकी लिस्ट थमा दी। हुक्म हुआ कि:

1.     नेटफ्लिक्स का एक साल का प्रीमियम सब्सक्रिप्शन रिचार्ज हो।

2.     गोल्ड जिम की एक साल की मेंबरशिप एक्टिवेट कराई जाए।

इंजीनियर की खुशीऔर फिरखौफ‘!

इंजीनियर साहब फूले नहीं समा रहे थे कि चलो, सस्ते में निपट गए। उन्होंने अपने पुराने विभाग के दोस्त को फोन लगाकर डींग हांकीभाई, इतना सस्ता IAS पहली बार देखा है!” लेकिन दोस्त ने जो जवाब दिया, उसने इंजीनियर साहब की बोलती बंद कर दी। दोस्त ने हंसते हुए समझायाअरे भाई, ये तो बस ट्रेलर है। जिस राज्य से साहब आए हैं, वहांनजराना‘, ‘शुकरानाऔरजबरानाकी परंपरा है। और ये साहब तो तीनों में एक्सपर्ट माने जाते हैं!”

क्या है येनजरानाशुकरानाका खेल?

प्रशासनिक भाषा में समझें तो:

  • नजराना: काम शुरू होने से पहले दी गई भेंट।
  • शुकराना: काम होने के बाद दिया गया धन्यवाद (रिश्वत)
  • जबराना: पद की धौंस दिखाकर जबरदस्ती वसूली।

आजकल के कुछ अफसर भ्रष्टाचार को भीअपग्रेडकर रहे हैं। फाइलें बाद में दौड़ती हैं, पहले नेटफ्लिक्स की सीरीज और फिटनेस की फिक्र होती है। अगर सचिव स्तर के अधिकारी हीजिम और सब्सक्रिप्शनकी उधारी पर चलेंगे, तो आम जनता की फाइलों पर ईमानदार मुहर की उम्मीद करना बेमानी है।

नेटफ्लिक्स और जिम तो हो गया, लेकिन इंजीनियर साहब अब इस चिंता में दुबले हो रहे हैं कि कहीं अगली डिमांडजबरानावाली जाए

  • Gaurav Singh

    Gaurav Singh

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