बड़े ‘साहब’ का छोटा खेल: चहेतों को रेवड़ी बांटने के चक्कर में नप गए युवा IAS, अब विदाई की बारी?

कहते हैं किकुर्सीहमेशा के लिए नहीं होती, लेकिन कुछ अफसरों को लगता है कि उनके रसूख का सूरज कभी अस्त नहीं होगा। प्रधानमंत्री की एक फ्लैगशिप योजना से जुड़े विभाग में तैनात एकयुवा IAS’ के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। कल तक विभाग में जिनकी तूती बोलती थी, आज उनके सितारे गर्दिश में हैं। नए सीनियर अफसरों की एंट्री क्या हुई, ‘साहबके साम्राज्य की दीवारें ताश के पत्तों की तरह ढहने लगी हैं।

अपनों परमेहरबानीपड़ी भारी

सूत्रों की मानें तो साहब अपने रसूख का इस्तेमाल कर सरकारी टेंडरों को अपनेप्रियलोगों की झोली में डालने का तानाबाना बुन चुके थे। नियम और शर्तें भी इस तरहमैन्युफैक्चरकी गई थीं कि रास्ता बिल्कुल साफ रहे। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। जिसखासव्यक्ति को फायदा पहुँचाने की तैयारी थी, उसी ने आवेदन में ऐसी तकनीकी गलतियां कीं कि पूरा टेंडर ही लटक गया।

खुलने लगीं फाइलें, बाहर आने लगे कंकाल

सीनियर अफसरों की पैनी नजर से अब साहब की कारगुजारियां छिप नहीं पा रही हैं। विभाग में अब एकएक फाइल को खंगाला जा रहा है और बताया जा रहा है कि एक के बाद एक कई टेंडरों में बड़ी खामियां और धांधलियां सामने रही हैं। जो टेंडर कल तकफाइनलमाने जा रहे थे, वे अब रद्द होने की कगार पर हैं।

तीखा प्रहार: ‘अच्छे दिनका ढलान और विदाई का काउंटडाउन

भ्रष्टाचार और भाईभतीजावाद के दम पर अपनी सल्तनत खड़ी करने वाले अफसरों के लिए यह एक बड़ा सबक है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाए और सरकारी तिजोरी कोनिजी जागीरसमझ लिया जाए, तो अंजाम ऐसा ही होता है।

गलियारों में अब चर्चा आम है कि साहब की इस विभाग से विदाई तय है। जांच की आंच जैसेजैसे ऊपर बढ़ रही है, साहब के चेहरे की हवाइयां उड़ रही हैं। सवाल यह है कि क्या सिर्फ विदाई होगी या इनगड़बड़ियोंका हिसाब भी लिया जाएगा?

बड़ी बातें:

  • फ्लैगशिप योजना: महत्वपूर्ण विभाग में तैनात युवा IAS की मनमानी पर लगी लगाम।
  • नियमों की बलि: चहेतों को टेंडर दिलाने के लिए नियमों को मरोड़ा गया।
  • सीनियर का हंटर: नए अधिकारियों के आते ही उजागर होने लगे भ्रष्टाचार के मामले।
  • विदाई तय: विभाग में चर्चा है कि साहब का बोरियाबिस्तर बंधना अब बस वक्त की बात है।
  • Gaurav Singh

    Gaurav Singh

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