फाइल के कीड़े’ को लगी रफ़्तार की बीमारी: ‘लूप लाइन’ से निकलते ही IAS साहब ने बदली गियर?

राजधानी डेस्क | कहते हैं कि वक्त बदलते ही इंसान की फितरत बदल जाती है, लेकिन किसी आईएएस (IAS) अफसर की कार्यशैली में 180 डिग्री का यूटर्न जाए, तो समझ लीजिए किपांचवीं मंजिलका आशीर्वाद काम कर गया है।

कल तकमीनमेख‘, आजसुपरफास्टएक्सप्रेस

एक साहब ऐसे हैं जो कई सालों तकलूप लाइन‘ (ठंडी पोस्टिंग) की धूल फांक रहे थे। उनकी पहचान यह थी कि वे फाइल में कामा और पूर्णविराम की गलतियां निकालने में महीनों गुजार देते थे। उनकी इसीबारीक नजरने उन्हें मुख्यधारा से इतना दूर कर दिया था कि सरकार भी उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने से कतराती थी। लेकिन किस्मत का पिटारा क्या खुला, साहब तो मानोबुलेट ट्रेनहो गए हैं।

दिल्ली तक मची खलबली, बाकी विभाग देखते रह गए

जैसे ही साहब को एक मध्यम दर्जे का विभाग मिला, उन्होंने अपनी पुरानी कार्यशैली को कूड़ेदान में फेंक दिया।

  • हैरतअंगेज बदलाव: जो फाइलें कल तक उनके मेज पर दम तोड़ती थीं, अब वे दौड़ रही हैं।
  • प्रस्ताव की रेस: केंद्र सरकार ने नए संस्थानों के लिए प्रस्ताव मांगे, तो बाकी विभाग अभी सोच ही रहे थे किसाहबने अगले ही दिन फाइल दिल्ली रवाना कर दी।
  • नंबर बनाने की होड़: सिर्फ काम ही नहीं किया, बल्कि भरी मीटिंग में बड़े साहब को यह जताने से भी नहीं चूके किसर, हमारा प्रस्ताव सबसे पहले गया है।

साहब का यहमेकओवरचर्चा का विषय बना हुआ है। लोग पूछ रहे हैं कि यह काम के प्रति असली जुनून है या फिर सेलूप लाइनमें जाने का खौफ? खैर, जो भी हो, फाइलें तो निपट रही हैं, चाहे वजहसेवाहो यासेल्फब्रांडिंग

प्रमुख बिंदु (Highlight Box):

  • रीब्रांडिंग: महीनों तक फाइल दबाने वाले अफसर अबरफ़्तार के पर्यायबने।
  • पांचवीं मंजिल का कमाल: ऊपर सेब्रेकथ्रूमिलते ही बदली साहब की चालढाल।
  • क्रेडिट वॉर: काम से ज्यादा इस बात की चिंता किनंबर वनकौन है।
  • Gaurav Singh

    Gaurav Singh

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