सिंगरौली महा-संग्राम: उमंग सिंघार की दहाड़ भी बेअसर, ‘अडानी प्रेम’ में अंधी हुई सरकार?

सिंगरौली की धरती परअडानी राजका नंगा नाच! जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए? मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने सिंगरौली के गरीबों, आदिवासियों और पिछड़ों को उनके हाल पर छोड़ दिया है। आलम यह है कि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने जब इस लूट के खिलाफ आवाज बुलंद की, तो उम्मीद थी कि सरकार जागेगी। लेकिन जागना तो दूर, सरकार ने अडानी समूह कोअभयदानदेते हुए जनता के सीने पर बुल्डोजर चलाने की खुली छूट दे दी है।

विधानसभा से सिंगरौली तक: विपक्ष की आवाज़ को कुचलने का खेल?

उमंग सिंघार ने सदन में दहाड़ते हुए साफ कहा था कि सिंगरौली के आदिवासियों की जमीन कौड़ियों के दाम लूटी जा रही है और मुआवजा गायब है। इसके बावजूद, सरकार और प्रशासन का अडानी को दिया जा रहाकवचकुंडलयह साबित करता है कि प्रदेश की सत्ता अब वल्लभ भवन से नहीं, बल्कि कॉर्पोरेट दफ्तरों से संचालित हो रही है। क्या भाजपा सरकार ने अपनी पूरी ताकत एक उद्योगपति की तिजोरी भरने में लगा दी है?

मुआवजे परतालाबंदी‘, बेदखली कीजल्दबाजी

सिंगरौली में बिना मुआवजा दिए आदिवासियों को हटाया जाना किसी अमानवीय अपराध से कम नहीं है। जिला प्रशासन के अधिकारी, जो जनता के सेवक होने चाहिए, वे आज अडानी केनिजी सुरक्षा गार्डकी तरह व्यवहार कर रहे हैं।

  • सवाल: गरीब आदिवासियों की पुश्तैनी जमीन को बिना पाई दिए हड़पने का अधिकार सरकार को किसने दिया?
  • आरोप: क्या भाजपा सरकार काविकाससिर्फ अडानी के मुनाफे तक सीमित है? क्या गरीब की झोपड़ी उजाड़ना हीरामराज्यका नया मॉडल है?

पर्यावरण काकत्लेआम‘: कहाँ गए वो लाखों पेड़?

विकास की बलि सिर्फ इंसान ही नहीं, प्रकृति भी चढ़ रही है। हजारों की संख्या में पुराने वृक्षों को बेदर्दी से काटा जा रहा है। सरकार दावा करती है कि वृक्षारोपण होगा, लेकिन हकीकत में सिंगरौली कोधूल और धुएं का नरकबना दिया गया है। कागजों पर हरेभरे जंगल उगाए जा रहे हैं, जबकि जमीन पर सिर्फ अडानी की मशीनें गरज रही हैं।

रामू काकाका चेहरा और अडानी का साम्राज्य?

सिंगरौली की पीड़ित जनता आज आक्रोश में है और सीधे सत्ता के शीर्ष पर निशाना साध रही है। लोग पूछ रहे हैंक्या प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री सिर्फमुखौटाहैं?  क्या सत्ता की बागडोर पूरी तरह अडानी के हाथों में गिरवी रखी जा चुकी है?

  • क्या सरकार के मन में जनता के प्रति रत्ती भर भी सद्भावना बची है, या यह पूरी तरहजुमलों की सरकारबन चुकी है?
  • उमंग सिंघार जैसे नेताओं की चेतावनी को अनसुना करना यह बताता है कि सरकार अब लोकतंत्र नहीं, बल्किअडानीतंत्रसे चल रही है।

जनता का सब्र टूटा तो भारी पड़ेगासिंहासन

आदिवासियों और विस्थापितों का यह शांत आक्रोश किसी बड़े तूफान की आहट है। उमंग सिंघार के उठाने के बाद भी अगर सरकार ने अडानी को संरक्षण देना बंद नहीं किया और मुआवजे का भुगतान तुरंत शुरू नहीं हुआ, तो सिंगरौली का यह मुद्दा भाजपा सरकार के ताबूत की आखिरी कील साबित हो सकता है। जनता देख रही है कि उसे बेघर कर किसके महल सजाए जा रहे हैं।

  • Gaurav Singh

    Gaurav Singh

    Related Posts

    उज्जैन में 3-5 अप्रैल 2026 को होगा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ – मध्यप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री मोहन यादव भी होंगे शामिल

    उज्जैन, मध्यप्रदेश — उज्जैन में अप्रैल 2026 के पहले सप्ताह में एक ऐतिहासिक आयोजन होने जा…

    आगे पढ़ें
    ₹20,000 करोड़ MFI क्रेडिट गारंटी योजना का असर: NBFC-MFI सेक्टर को राहत या सीमित फायदा?

    भारत सरकार द्वारा शुरू की गई ₹20,000 करोड़ की माइक्रोफाइनेंस क्रेडिट गारंटी योजना (MFI Credit Guarantee…

    आगे पढ़ें

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    उज्जैन में 3-5 अप्रैल 2026 को होगा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ – मध्यप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री मोहन यादव भी होंगे शामिल

    उज्जैन में 3-5 अप्रैल 2026 को होगा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ – मध्यप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री मोहन यादव भी होंगे शामिल

    ₹20,000 करोड़ MFI क्रेडिट गारंटी योजना का असर: NBFC-MFI सेक्टर को राहत या सीमित फायदा?

    ₹20,000 करोड़ MFI क्रेडिट गारंटी योजना का असर: NBFC-MFI सेक्टर को राहत या सीमित फायदा?

    बंगाल का रण और चुनाव आयोग के फैसले: क्या अधिकारियों के तबादले तय करेंगे सत्ता का भविष्य?

    बंगाल का रण और चुनाव आयोग के फैसले: क्या अधिकारियों के तबादले तय करेंगे सत्ता का भविष्य?

    राजनीति के ‘शिखर’ और जनसेवा के ‘पर्याय’: क्या अपनों की ही घेराबंदी का शिकार हो रहे हैं जननायक संजय पाठक?

    राजनीति के ‘शिखर’ और जनसेवा के ‘पर्याय’: क्या अपनों की ही घेराबंदी का शिकार हो रहे हैं जननायक संजय पाठक?

    ‘मुखिया’ की पसंद भी ठुकराई, ADG साहब की नज़र अब दिल्ली के दरबार पर

    ‘मुखिया’ की पसंद भी ठुकराई, ADG साहब की नज़र अब दिल्ली के दरबार पर