
मध्य प्रदेश में निवेश और उद्योगों को लेकर सरकार जहाँ एक ओर बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इन दावों की हवा निकाल दी है। एक कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के एक सीनियर IAS अधिकारी ने कुछ ऐसा कह दिया, जिससे पूरी सरकार और प्रशासनिक अमला सख्ते में है।
मध्य प्रदेश में इन्वेस्टर्स समिट और ग्लोबल इन्वेस्टर मीट जैसे आयोजनों के जरिए सरकार लगातार यह दावा करती आई है कि प्रदेश में उद्योगों की कतार लगी है और निवेश का बाढ़ आ गई है। लेकिन सच्चाई कुछ और ही है, और यह सच्चाई किसी विपक्षी नेता ने नहीं, बल्कि सरकार के ही एक प्रमुख सचिव (PS) स्तर के वरिष्ठ अधिकारी ने सार्वजनिक मंच से स्वीकार की है।
केंद्र सरकार के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे इस वरिष्ठ अफसर ने बड़ी बेबाकी से कहा कि— “इतने सालों के लगातार प्रयासों के बावजूद, हम प्रदेश में कोई बड़ी इंडस्ट्री लाने में सफल नहीं हो सके हैं। इस मामले में हम पूरी तरह विफल रहे हैं।”
- अधिकारी का बयान: “हम बड़ी इंडस्ट्री लाने में कामयाब नहीं हो सके।”
- विफलता का स्वीकार: “इस मामले में हम पूरी तरह विफल रहे हैं।”
- हैरानी: सरकारी मंच पर मौजूद लोग अधिकारी की बेबाकी देखकर दंग रह गए।
यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जहाँ मुख्यमंत्री और मंत्री मंचों से प्रदेश के औद्योगिक विकास की गुलाबी तस्वीर पेश करते हैं, वहीं सिस्टम के भीतर बैठा एक जिम्मेदार अधिकारी इसे सीधे तौर पर नकार रहा है। हालांकि, प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि यह ‘साहब’ अपनी ईमानदारी और बेबाक अंदाज़ के लिए पहले से ही जाने जाते हैं, लेकिन सरकार के दावों की इस तरह पोल खोलना अब एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
अब सवाल यह उठता है कि क्या सरकार के निवेश के आंकड़े सिर्फ कागजों तक सीमित हैं? अगर एक वरिष्ठ IAS अधिकारी सार्वजनिक रूप से विफलता स्वीकार कर रहा है, तो जवाबदेही किसकी है? इस बयान के बाद अब विपक्षी दल भी सरकार को घेरने की तैयारी में हैं।









