
देहरा तिजारा।मुकेश कुमार जैन| देहरा तिजारा में आयोजित 31वें चातुर्मास के दौरान धर्मसभा में परम पूज्य आचार्य श्री 108 विमर्श सागर जी महाराज ने कर्म सिद्धांत पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दृढ़ संकल्प ही कर्मों के आश्रव को रोकने का सबसे प्रभावी साधन है। बाहरी परिस्थितियां तभी प्रभाव डालती हैं, जब मन के भाव उनसे प्रभावित होते हैं।
त्याग का आधार है दृढ़ संकल्प
आचार्य श्री ने कहा कि त्याग केवल बाहरी आचरण नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प का परिणाम है। जब व्यक्ति किसी आदत या प्रवृत्ति का त्याग करने का निश्चय कर लेता है और उस पर अडिग रहता है, तब विपरीत परिस्थितियां भी उसे अपने मार्ग से विचलित नहीं कर पातीं।
संयम से मिलती है आत्मविजय
प्रवचन के दौरान उन्होंने कहा कि मोक्षमार्ग पर चलने वाले साधकों के जीवन में अनेक परीक्षाएं आती हैं। जो व्यक्ति संयम, आत्मबल और दृढ़ संकल्प के साथ इन परिस्थितियों का सामना करता है, वही वास्तविक आत्मविजय प्राप्त करता है और कर्मबंधन से मुक्ति की दिशा में आगे बढ़ता है।
बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु
धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री के प्रवचनों का श्रवण किया और अपने जीवन में त्याग, संयम तथा दृढ़ संकल्प अपनाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर मंदिर अध्यक्ष मुकेश जैन, महामंत्री नरेंद्र जैन, उपाध्यक्ष शिवम जैन, प्रचार मंत्री उमंग जैन, चातुर्मास अध्यक्ष सुरेश जैन, सचिव नीरज जैन सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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