
आरोन/गुना (मोहित सोनी की रिपोर्ट): तहसील मुख्यालय आरोन में मंदिर की 10 एकड़ से अधिक माफी भूमि की नीलामी प्रक्रिया को लेकर विवाद गहरा गया है। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) आरोन द्वारा जारी सूचना पत्र के जवाब में वंशानुगत पुजारियों ने लिखित विधिक आपत्ति प्रस्तुत करते हुए नीलामी प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की है। वंशानुगत पुजारियों का कहना है कि वे पीढ़ियों से मंदिर की सेवा और उससे संबंधित कृषि भूमि के संरक्षण एवं प्रबंधन का कार्य करते आ रहे हैं। प्रशासनिक नोटिस के जवाब में प्रस्तुत आपत्ति में उन्होंने भूमि की नीलामी को लेकर विभिन्न न्यायिक एवं संवैधानिक प्रावधानों का हवाला दिया है।
मंदिर संपत्ति के स्वामित्व को लेकर दिया न्यायिक निर्णयों का हवाला
पुजारियों ने अपनी आपत्ति में हिंदू विधि और सर्वोच्च न्यायालय के सिविल अपील क्रमांक 4850/2021 में दिए गए निर्णय का हवाला देते हुए कहा है कि मंदिर की संपत्ति का वास्तविक स्वामी देवता को माना जाता है, जबकि पुजारी देवता के सेवक के रूप में धार्मिक सेवा का दायित्व निभाते हैं।
हाईकोर्ट में याचिका लंबित होने का दावा
पुजारियों ने यह भी बताया कि इसी विषय से संबंधित एक याचिका W.P. No. 21677/2026 ग्वालियर स्थित मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ में विचाराधीन है। उनका कहना है कि जब तक न्यायालय द्वारा मामले में अंतिम निर्णय नहीं दिया जाता, तब तक भूमि की नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा।
संवैधानिक अधिकारों का भी दिया हवाला
विधिक आपत्ति में संविधान के अनुच्छेद 25 एवं 26 का उल्लेख करते हुए धार्मिक परंपराओं और धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन से जुड़े अधिकारों के संरक्षण की बात कही गई है।
नीलामी प्रक्रिया पर तत्काल रोक की मांग
वंशानुगत पुजारियों ने प्रशासन से मांग की है कि मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण मंदिर की माफी भूमि की नीलामी से संबंधित किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई को तत्काल रोका जाए। अब इस मामले में प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।
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