
भोपाल/ आदि मिश्रा: मध्य प्रदेश के शासकीय नर्सिंग कॉलेजों की व्यवस्थाओं को लेकर NSUI ने सरकार और स्वास्थ्य शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने पत्रकारवार्ता में दावा किया कि प्रदेश के कई सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में निर्धारित पद खाली हैं और जरूरी शैक्षणिक फैकल्टी की कमी के बावजूद संस्थान संचालित किए जा रहे हैं। संगठन ने मान्यता प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और दस्तावेजों के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
6 कॉलेजों में प्राचार्य और 10 में उप प्राचार्य नहीं होने का दावा
NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार के मुताबिक प्रदेश के 6 शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में प्राचार्य और 10 कॉलेजों में उप प्राचार्य के पद खाली हैं। इसके अलावा करीब 15 कॉलेजों में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और ट्यूटर जैसे पदों पर भी आवश्यक संख्या में फैकल्टी उपलब्ध नहीं होने का दावा किया गया है।
NSUI का कहना है कि नर्सिंग कॉलेजों के संचालन और मान्यता के लिए निर्धारित शैक्षणिक मानकों का पालन जरूरी है। ऐसे में यदि सरकारी संस्थानों में ही जरूरी पद रिक्त हैं, तो कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
मान्यता प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल
NSUI ने नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठन का दावा है कि कुछ संस्थानों की मान्यता के लिए कथित तौर पर फर्जी या कूटरचित अनुभव प्रमाण-पत्रों का इस्तेमाल किया गया।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। NSUI ने संबंधित दस्तावेजों और प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मान्यता के दौरान निर्धारित नियमों का पालन हुआ था या नहीं।
बीएमएचआरसी और अमरकंटक कॉलेज का दिया उदाहरण
रवि परमार ने भोपाल स्थित बीएमएचआरसी नर्सिंग कॉलेज और अमरकंटक के शासकीय नर्सिंग कॉलेज का उदाहरण देते हुए वहां मान्यता के लिए प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों पर सवाल उठाए।
NSUI का कहना है कि यदि मान्यता से संबंधित दस्तावेजों में किसी तरह की गड़बड़ी हुई है, तो इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
नर्सिंग शिक्षा पर पड़ सकता है सीधा असर
मामले को लेकर अधिवक्ताओं का कहना है कि नर्सिंग शिक्षा सीधे स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ी हुई है। नर्सिंग विद्यार्थियों को पर्याप्त संख्या में योग्य शिक्षकों और प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है।
यदि कॉलेजों में निर्धारित फैकल्टी उपलब्ध नहीं है, तो इसका असर विद्यार्थियों की पढ़ाई, प्रशिक्षण और भविष्य की पेशेवर क्षमता पर पड़ सकता है। यही वजह है कि नर्सिंग कॉलेजों में मानकों के पालन को लेकर उठाए जा रहे सवालों को गंभीरता से देखा जाना जरूरी है।
हाईकोर्ट में याचिका दायर करने का दावा
NSUI ने दावा किया है कि पूरे मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। संगठन की मांग है कि शासकीय नर्सिंग कॉलेजों की व्यवस्थाओं, मान्यता प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
साथ ही NSUI ने जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की है। संगठन का कहना है कि यदि जांच में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
सरकार को आंदोलन की चेतावनी
NSUI ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि मामले में जल्द निष्पक्ष जांच और आवश्यक सुधार नहीं किए गए तो संगठन विद्यार्थियों के साथ आंदोलन करेगा। संगठन का कहना है कि जरूरत पड़ने पर आंदोलन को सड़क से लेकर न्यायालय तक ले जाया जाएगा।
अब इस मामले में सरकार और संबंधित विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। यदि NSUI द्वारा लगाए गए आरोपों में तथ्य सामने आते हैं, तो सरकारी नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता, फैकल्टी और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की समीक्षा महत्वपूर्ण होगी।
नोट: इस खबर में नर्सिंग कॉलेजों की व्यवस्थाओं, फैकल्टी की कमी और मान्यता प्रक्रिया से जुड़े आरोप NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार एवं संगठन द्वारा लगाए गए दावों पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है। संबंधित विभाग और सरकार का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।
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