
भोपाल। राजधानी भोपाल में वैध और अवैध होर्डिंग को लेकर एक बार फिर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। शहर में बड़ी संख्या में लगे विज्ञापन बोर्ड और होर्डिंग को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि इनमें से कितनों को नियमानुसार अनुमति मिली है और कितने बिना अनुमति लगाए गए हैं। इस मुद्दे को अब नगर निगम की बैठक में उठाकर संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगे जाने की तैयारी है।
वैध होर्डिंग की संख्या को लेकर भी सवाल
भोपाल में होर्डिंग व्यवस्था लंबे समय से चर्चा में रही है। वर्ष 2026 की एक रिपोर्ट में नगर निगम के होर्डिंग सेल के रिकॉर्ड के आधार पर बताया गया था कि करीब 605 होर्डिंग को अनुमति प्राप्त थी, जबकि शहर में एक हजार से अधिक बड़े होर्डिंग और यूनिपोल मौजूद होने की बात सामने आई थी। अलग-अलग सरकारी एजेंसियों द्वारा अनुमति दिए जाने के कारण इनके नियमन और निगरानी को लेकर भी सवाल उठे थे।
ऐसे में अब वैध और अवैध होर्डिंग का वास्तविक आंकड़ा सार्वजनिक करने की मांग महत्वपूर्ण हो गई है। साथ ही यह भी स्पष्ट करने की जरूरत है कि किस क्षेत्र में किस एजेंसी ने अनुमति दी है।
सड़क सुरक्षा को लेकर भी चिंता
अवैध या नियमों के विपरीत लगाए गए होर्डिंग केवल शहर की सुंदरता से जुड़ा मुद्दा नहीं हैं। कई जगह बड़े विज्ञापन बोर्ड सड़क संकेतों और यातायात संकेतकों को ढक देते हैं। इससे वाहन चालकों को परेशानी हो सकती है और दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है। अक्टूबर में सामने आई एक रिपोर्ट में वीआईपी रोड, टीटी नगर, अरेरा कॉलोनी समेत कई क्षेत्रों में राजनीतिक पोस्टर और फ्लेक से सड़क संकेत प्रभावित होने की बात कही गई थी।
बारिश और तेज हवा के दौरान कमजोर ढांचे वाले होर्डिंग पैदल यात्रियों और वाहन चालकों के लिए अतिरिक्त खतरा पैदा कर सकते हैं।
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नगर निगम की कार्रवाई पर भी मांगा जाएगा हिसाब
होर्डिंग को लेकर सवाल सिर्फ अनुमति तक सीमित नहीं हैं। यह भी पूछा जा रहा है कि अवैध पाए गए होर्डिंग के खिलाफ अब तक कितनी कार्रवाई हुई, कितने हटाए गए और कितने मामलों में जुर्माना वसूला गया।
नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार अवैध होर्डिंग की निगरानी के लिए जीपीएस आधारित व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा रहा है और शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाती है। हालांकि, राजनीतिक विज्ञापनों से जुड़े मामलों में लगाए गए जुर्माने का विस्तृत आंकड़ा सार्वजनिक नहीं होने पर जवाबदेही को लेकर सवाल बने हुए हैं।
नगर निगम में उठेगा मामला
अब वैध और अवैध होर्डिंग के पूरे आंकड़े, अनुमति प्रक्रिया और कार्रवाई की जानकारी नगर निगम के सामने रखने की मांग की जा रही है। साथ ही यह स्पष्ट करने की जरूरत है कि अलग-अलग विभागों और एजेंसियों की ओर से जारी अनुमतियों की निगरानी कौन करता है।
मध्यप्रदेश में बाहरी विज्ञापन से जुड़े नियमों में अनधिकृत होर्डिंग हटाने और कार्रवाई का प्रावधान है। ऐसे में नगर निगम की बैठक में यह मुद्दा उठने के बाद कार्रवाई और जवाबदेही को लेकर तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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