
भोपाल। भोपाल नगर निगम परिषद की बैठक में नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी के एक बयान को लेकर शुक्रवार को जमकर हंगामा हुआ। न्यू मार्केट मल्टीलेवल पार्किंग के चौथी मंजिल स्थित हॉल को किराए पर देने के प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान जकी ने कहा, “मैं कमीशन नहीं लेती।” उनके इस बयान पर भाजपा पार्षदों ने आपत्ति जताई और माफी की मांग की। विवाद बढ़ने पर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने बयान को कार्यवाही से हटाने और शब्द वापस लेने के निर्देश दिए। हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही करीब 15 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।
बयान पर आमने-सामने आए भाजपा और कांग्रेस पार्षद
बैठक के दौरान शबिस्ता जकी के बयान के बाद भाजपा पार्षदों ने निगम अध्यक्ष की आसंदी के पास पहुंचकर विरोध जताया। भाजपा पार्षदों का कहना था कि सदन में बिना तथ्य या प्रमाण के इस तरह की बात नहीं कही जानी चाहिए। अध्यक्ष ने भी बयान को आपत्तिजनक बताते हुए उसे कार्यवाही से विलोपित करने और वापस लेने को कहा।
वहीं कांग्रेस पार्षदों ने जकी का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने किसी व्यक्ति पर आरोप नहीं लगाया था। उनका कहना था कि जकी ने केवल अपने बारे में बात कही थी। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
जकी ने माफी मांगने से किया इनकार
विवाद के बीच शबिस्ता जकी ने कहा कि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया है और उनके बयान की पुष्टि बैठक की वीडियो रिकॉर्डिंग से की जा सकती है। उन्होंने अपने शब्दों के लिए माफी मांगने से इनकार कर दिया।
दूसरी ओर भाजपा पार्षदों ने बयान को अनुचित बताते हुए माफी की मांग जारी रखी। एमआईसी सदस्य रविंद्र यती समेत भाजपा पार्षदों ने कहा कि सदन में इस तरह के बयान से गलत संदेश जाता है। इसके बाद हंगामा बढ़ गया और कार्यवाही कुछ समय के लिए रोकनी पड़ी।
यह भी पढ़े: मध्यप्रदेश में बदलेंगे पंचायत राज के नियम, ग्राम सभा के अधिकारों और टैक्स व्यवस्था में बदलाव की तैयारी
निगम की संपत्तियों को लंबे समय तक किराए पर देने का प्रस्ताव
बैठक में निगम की संपत्तियों के इस्तेमाल और उन्हें किराए पर देने से जुड़े प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। नए निगम मुख्यालय के सर्विस ब्लॉक को पहले दो वर्ष के लिए देने का प्रस्ताव था, जिसे अब 10 वर्ष और आगे 10 वर्ष के नवीनीकरण के साथ अधिकतम 20 वर्ष तक देने का प्रस्ताव रखा गया है।
इसके अलावा न्यू मार्केट मल्टीलेवल पार्किंग की चौथी मंजिल स्थित हॉल को किराए पर देने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। सत्ता पक्ष ने इसे निगम की आय बढ़ाने की दिशा में कदम बताया, जबकि विपक्ष ने प्रस्तावों की स्पष्टता और प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए।
दूषित पानी, शिक्षा उपकर और सफाईकर्मियों की कमी पर सवाल
परिषद की बैठक में शहर की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई मुद्दे भी उठे। दूषित पानी को लेकर पार्षदों ने सवाल किए। निगम की ओर से 901 शिकायतों के निराकरण की जानकारी दी गई। कुछ पार्षदों ने अपने क्षेत्रों में पाइपलाइन का आकार बढ़ाने की मांग भी रखी।
शिक्षा उपकर से मिलने वाली राशि के इस्तेमाल और सरकारी स्कूलों के विकास का मुद्दा भी उठा। वहीं सफाईकर्मियों की कमी को लेकर सभी 85 वार्डों में जरूरत का आकलन कर भर्ती की मांग की गई। दिशा सूचक बोर्डों पर लगे पोस्टर और बैनर हटाने के निर्देश भी निगम प्रशासन को दिए गए।
आगे भी निगम परिषद में टकराव के आसार
बैठक में अमृत-2.0 योजना के लिए 493.49 करोड़ रुपये जुटाने, निगम की संपत्तियों को लंबे समय के लिए किराए पर देने और जलापूर्ति से जुड़े प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। इन मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मतभेद सामने आए।
शबिस्ता जकी के बयान से शुरू हुआ विवाद फिलहाल कार्यवाही स्थगित होने के बाद शांत हुआ, लेकिन जिस तरह कई प्रस्तावों पर पक्ष-विपक्ष आमने-सामने आया, उससे साफ है कि निगम परिषद की आगामी बैठकों में भी राजनीतिक बहस तेज रह सकती है।
- bhopal-municipal-council-shabista-zaki-commission-statement-uproar








