
भोपाल/आदित्य शंकर तिवारी: NITTTR भोपाल में भारतीय ज्ञान परंपरा विषय पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें भारतीय शिक्षा दर्शन, राष्ट्रचेतना और सांस्कृतिक मूल्यों पर गंभीर विमर्श हुआ। उद्घाटन सत्र के मुख्य वक्ता डॉ. रविन्द्र कान्हेरे, अध्यक्ष, विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान तथा द्वितीय सत्र के मुख्य वक्ता निखिलेश माहेश्वरी, प्रांत संगठन मंत्री, विद्या भारती, मध्य भारत प्रांत रहे।
भारत की परंपरा में शिक्षा समाज का विषय
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. रविन्द्र कान्हेरे ने कहा कि भारत की परंपरा में शिक्षा सदैव समाज का विषय रही है, शासन का नहीं। उन्होंने भारतीय शिक्षा दर्शन को केवल ज्ञानार्जन का माध्यम न मानकर चरित्र निर्माण और सामाजिक दायित्व से जोड़ने पर बल दिया। उन्होंने पंचकोशीय शिक्षा की अवधारणा तथा चार प्रकार के शिक्षार्थियों सुनने वाले, समझने वाले, प्रयोग करने वाले और प्रसारित करने वाले की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया।
वंदे मातरम् मात्र एक गीत नहीं
द्वितीय सत्र में श्री निखिलेश माहेश्वरी ने वंदे मातरम् की ऐतिहासिक यात्रा के माध्यम से राष्ट्रीय आंदोलन की चेतना को प्रस्तुत करते हुए कहा कि वंदे मातरम् मात्र एक गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वाभिमान और आध्यात्मिक चेतना की अनवरत यात्रा का गौरवगान है। उन्होंने कहा कि इसका विरोध वस्तुतः भारत की प्राणशक्ति का विरोध है।
भारतीय संस्कृति और परंपरा के प्रति जागरूक
संस्थान के निदेशक डॉ. सी.सी. त्रिपाठी ने कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को भारतीय संस्कृति और परंपरा के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ आधुनिक शिक्षण पद्धतियों में भारतीय ज्ञान परंपराओं के समावेश की दिशा भी प्रदान करता है।
विज्ञान, तकनीक और मानविकी के क्षेत्रों मार्गदर्शक कि भूमिका निभा रही है
डीन साइंस एवं आईकेएस विभागाध्यक्ष प्रो. पी.के. पुरोहित ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल इतिहास का विषय नहीं, बल्कि आज विज्ञान, तकनीक और मानविकी के क्षेत्रों में भी मार्गदर्शक भूमिका निभा रही है।
राष्ट्रीय शिक्षा दृष्टि को प्रभावी रूप से रेखांकित किया गया
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अमित दुबे ने किया तथा आभार प्रदर्शन डॉ. रामेंद्र सिंह ने किया। कार्यक्रम ने भारतीय ज्ञान परंपरा की समकालीन प्रासंगिकता और राष्ट्रीय शिक्षा दृष्टि को प्रभावी रूप से रेखांकित किया। इस कार्यक्रम मै देशभर के शिक्षकों ने भाग लिया।
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